जिनपिंग की ट्रंप को कड़ी चेतावनीः कहा-‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ से बच के रहना, अमेरिका-चीन टकराए तो दुनिया देखेगी तबाही
punjabkesari.in Tuesday, May 19, 2026 - 06:45 PM (IST)
International Desk: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को एक बेहद अहम कूटनीतिक संदेश देते हुए “थ्यूसाइडिडेस ट्रैप” से बचने की सलाह दी है। यह टिप्पणी उस समय आई जब दोनों नेताओं के बीच वैश्विक तनाव, व्यापार, सैन्य प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक प्रभुत्व को लेकर चर्चा हो रही थी। जिनपिंग ने कहा कि दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है और सवाल यह है कि क्या चीन और अमेरिका इतिहास की उस गलती को दोहराने से बच पाएंगे, जिसने कभी प्राचीन यूनान को विनाशकारी युद्ध में झोंक दिया था।
क्या है ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’?
“थ्यूसाइडिडेस ट्रैप” की अवधारणा प्राचीन यूनानी इतिहासकार Thucydides के लेखन से निकली है। उन्होंने एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण करते हुए लिखा था कि “एथेंस के उभार और उससे स्पार्टा में पैदा हुए भय ने युद्ध को अपरिहार्य बना दिया।” आधुनिक दौर में अमेरिकी विद्वान ग्राहम एलिसन (Graham Allison) ने इस विचार को लोकप्रिय बनाया। उनका तर्क है कि जब कोई नई शक्ति तेजी से उभरती है और पुरानी महाशक्ति को चुनौती देती है, तो दोनों के बीच संघर्ष का खतरा बेहद बढ़ जाता है।
अमेरिका और चीन की तुलना क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार आज चीन तेजी से आर्थिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति बन रहा है, जबकि अमेरिका लंबे समय से दुनिया की प्रमुख महाशक्ति रहा है। यही कारण है कि कई विश्लेषक मौजूदा अमेरिका-चीन संबंधों की तुलना स्पार्टा और एथेंस से करते हैं। हालांकि जिनपिंग ने साफ संकेत दिया कि बीजिंग टकराव नहीं बल्कि सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ऐसा नया मॉडल बनाना चाहिए जिसमें प्रतिस्पर्धा युद्ध में न बदले।
ट्रंप और पश्चिमी देशों में बढ़ी बहस
यह अवधारणा अमेरिका में पहले भी काफी चर्चा में रही है। ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में भी इस पर बहस हुई थी। कुछ अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन को और ताकतवर बनने से पहले रोकना जरूरी है, जबकि दूसरे विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा रवैया खुद युद्ध का कारण बन सकता है।
आलोचक की राय
कई इतिहासकारों का कहना है कि “थ्यूसाइडिडेस ट्रैप” को बहुत ज्यादा सरल तरीके से पेश किया जाता है। उनका मानना है कि युद्ध केवल शक्ति संतुलन से नहीं होते, बल्कि नेताओं के फैसले, राजनीतिक माहौल, डर, गलतफहमियां और कूटनीतिक विफलताएं भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका और चीन संवाद, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संतुलन बनाए रखें, तो इतिहास को दोहराने से रोका जा सकता है।
दुनिया क्यों चिंतित ?
दक्षिण चीन सागर, ताइवान, व्यापार युद्ध, टेक्नोलॉजी प्रतिबंध और इंडो-पैसिफिक में सैन्य गतिविधियों ने पहले ही दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। ऐसे में जिनपिंग का यह बयान सिर्फ ऐतिहासिक संदर्भ नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के लिए एक बड़ा चेतावनी संदेश माना जा रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक अगर दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां सीधे टकराव की राह पर बढ़ती हैं, तो उसका असर केवल एशिया या अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता पर पड़ेगा।
