पाकिस्तान में शांति वार्ता की कोशिशें जारीः ईरानी विदेश मंत्री ने आर्मी चीफ मुनीर व PM शहबाज से मुलाकात की, ट्रंप के दूत भी पहुंच रहे इस्लामाबाद
punjabkesari.in Saturday, Apr 25, 2026 - 06:50 PM (IST)
International Desk: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता कराने की कोशिशें जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची वहां पहुंच चुके हैं और पाकिस्तानी नेतृत्व से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की। अमेरिका की ओर से स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान जा रहे हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि वे सीधे ईरानी अधिकारियों से मिलेंगे या पाकिस्तान के जरिए परोक्ष बातचीत होगी। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन वार्ताओं में शामिल नहीं हो रहे हैं। कूटनीति की जिम्मेदारी अब काफी हद तक ट्रम्प के करीबी लोगों विटकॉफ और कुशनर को दी गई है।
🇮🇷🇵🇰Iran’s FM Araghchi meets Pakistan’s PM in Islamabad
— Sputnik (@SputnikInt) April 25, 2026
Islamabad is mediating between Tehran and Washington, with US envoys Steve Witkoff and Jared Kushner also heading to Pakistan for talks amid reports of a possible Iran-US channel opening in Islamabad. Tehran, however, says… https://t.co/UPmE9G5ZMo pic.twitter.com/7pcidg8qFb
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की विदेश नीति में बदलाव दिखता है, जहां पारंपरिक राजनयिक भूमिकाओं की बजाय निजी और करीबी सलाहकार ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। इस पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण Hormuz जलडमरूमध्य है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश आमने-सामने बैठेंगे? ईरान ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह सीधे बातचीत नहीं करेगा बल्कि पाकिस्तान के जरिए “indirect talks” ही करेगा।
इस बीच, ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रही, तो वह इसका जवाब देगा। ईरानी सेना ने कहा है कि वह “आक्रामक कार्रवाई” और “समुद्री डकैती” को बर्दाश्त नहीं करेगी। यह तनाव Hormuz जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा है, जो दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम रास्ता है। अमेरिका ने यह नाकेबंदी तब लागू की थी, जब ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने की कोशिश की।
