ईरान में कौन चला रहा सत्ता? नए सर्वोच्च नेता मोजतबा की चुप्पी से बढ़ीं अटकलें, कट्टरपंथियों ने उठाए सवाल

punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 12:59 PM (IST)

International Desk: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद देश में राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की लगातार सार्वजनिक गैरमौजूदगी ने ईरान की सत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में सरकार के अन्य वरिष्ठ नेता अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, जबकि कट्टरपंथी गुट इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं। अली खामेनेई के उत्तराधिकारी बनने के बाद मोजतबा खामेनेई अब तक किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम या राष्ट्रीय संबोधन में नजर नहीं आए हैं। उनकी यह चुप्पी और सीमित सार्वजनिक उपस्थिति ईरान के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता की भूमिका केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सैन्य और राजनीतिक फैसलों में भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी कई तरह की अटकलों को जन्म दे रही है।

 

सरकार के दूसरे नेता बने ज्यादा सक्रिय
हाल के दिनों में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय दिखाई दिए हैं। अमेरिका के साथ वार्ता, युद्धविराम और विदेश नीति से जुड़े अधिकांश फैसलों में भी यही नेता प्रमुख भूमिका निभाते नजर आए। ईरान मामलों के विशेषज्ञ अराश अज़ीजी (Clemson University) ने CNN से कहा कि मोजतबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति के कारण गालिबाफ और उनके सहयोगी फिलहाल देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे बनकर उभरे हैं। उनके अनुसार इसी वजह से कट्टरपंथी धड़े ने उन पर "सत्ता हथियाने" तक के आरोप लगाए हैं।

 

कट्टरपंथियों ने उठाए सवाल
कट्टरपंथी नेताओं का आरोप है कि सरकार सर्वोच्च नेता के निर्देशों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है और संसद की भूमिका भी कमजोर की जा रही है। उनका दावा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को अधिक शक्तियां देकर पारंपरिक सत्ता ढांचे में बदलाव की कोशिश हो रही है। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जर्मनी के German Institute for International and Security Affairs (SWP) से जुड़े ईरान विशेषज्ञ हामिदरेज़ा अज़ीजी का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व कट्टरपंथी गुटों के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार सरकार चाहती है कि आंतरिक राजनीतिक स्थिरता बनी रहे और विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर अनावश्यक दबाव न बने। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के भीतर अलग-अलग राजनीतिक धड़ों के बीच मतभेद जरूर बढ़े हैं । 


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Content Writer

Tanuja

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