ईरान को प्यासा तड़पाने की कोशिश में अमेरिका? वॉटर प्लांट पर हमला, विदेश मंत्री ने दी कड़ी चेतावनी

punjabkesari.in Saturday, Mar 07, 2026 - 11:32 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाज़ी और तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को आरोप लगाया कि United States ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर स्थित एक मीठे पानी के डीसैलिनेशन (समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले) प्लांट पर हमला किया है।

अराघची ने इस हमले को “खुला और हताश अपराध” बताते हुए कहा कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।


30 गांवों की पानी सप्लाई प्रभावित

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि Qeshm Island पर बने इस प्लांट पर हमले के कारण आसपास के करीब 30 गांवों की पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई है। उन्होंने कहा कि किसी देश की बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर हमला करना बेहद खतरनाक कदम है और इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अराघची के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई की शुरुआत अमेरिका ने की है, न कि ईरान ने।

ट्रंप का दावा: ईरान ने पड़ोसियों से माफी मांगी

दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों से माफी मांग ली है और अब उन पर हमला नहीं करने का वादा किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि लगातार अमेरिकी और इजरायली हमलों के कारण ईरान दबाव में आ गया है और उसने अपने पड़ोसियों के खिलाफ आक्रामक रुख छोड़ने का आश्वासन दिया है।

उन्होंने कहा कि ईरान पहले मध्य-पूर्व में दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब वह हार चुका है।

“ईरान अब मध्य-पूर्व का दबंग नहीं”

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अब ईरान मध्य-पूर्व का “बुली” (दबंग) देश नहीं रहा, बल्कि अब वह “मध्य-पूर्व का हारने वाला देश” बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक ईरान पूरी तरह झुक नहीं जाता या उसकी स्थिति कमजोर नहीं हो जाती, तब तक यह स्थिति जारी रह सकती है।

ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान पर और कड़े हमले किए जा सकते हैं, और ऐसे कई इलाके तथा समूह भी निशाने पर आ सकते हैं जिन्हें अब तक लक्ष्य नहीं बनाया गया था।

मियामी सम्मेलन में भी ईरान का जिक्र

इस बीच ट्रंप ने Miami में आयोजित शील्ड ऑफ द अमेरिकास शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं का स्वागत करते हुए भी ईरान का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने अमेरिकी सेना को मजबूत बनाया था और अब उसी ताकत का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में अमेरिका को “अच्छे नतीजे” मिल रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक ईरान पिछले कई दशकों से क्षेत्र में हिंसा और संघर्ष के लिए जिम्मेदार रहा है और अब उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी थी।

क्षेत्र में बढ़ रहा तनाव

ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमले के आरोप और ट्रंप के सख्त बयानों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।


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Content Writer

Pardeep

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