सच हो रही मुस्लिम नेता की भविष्यवाणी, बुर्का बैन के बाद ही क्यों हिंसा से जल उठे इटली-फ्रांस?
punjabkesari.in Sunday, Oct 18, 2026 - 05:07 PM (IST)
Dubai: यूरोप के दो बड़े देशों फ्रांस और इटली में हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों ने महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, सार्वजनिक सेवाओं और सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष उजागर किया है। 17 अक्टूबर को फ्रांस में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें कुछ जगहों पर आगजनी, दुकानों में लूटपाट और पुलिस के साथ झड़पें हुईं। इटली के मिलान में भी महंगाई और युद्धों के खिलाफ निकला प्रदर्शन हिंसक हो गया। फ्रांस-इटली में हिंसक प्रदर्शनों के बीच संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नहयान की नौ साल पुरानी चेतावनी फिर चर्चा में है।
शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मई 2017 में रियाद में आयोजित ‘ट्वीप्स फोरम’ में यूरोप में आतंकवाद और कट्टरपंथ के खतरे पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि निर्णय लेने में देरी और राजनीतिक रूप से सही दिखने की कोशिश यूरोपीय देशों के लिए भारी पड़ सकती है। उन्होंने चेताया था कि आने वाले समय में यूरोप से और अधिक कट्टरपंथी, चरमपंथी तथा आतंकवादी निकल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि आतंकवाद की समस्या से निपटने में नाकामी के कारण कुछ देशों को आतंकवाद के पनपने की जमीन के रूप में देखा जा सकता है।
17 अक्टूबर को फ्रांस में महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए। कई स्थानों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर दुकानों में लूटपाट, इमारतों में आगजनी और पुलिस के साथ झड़पें हुईं।फ्रांस के अधिकारियों ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। इन घटनाओं के बीच कट्टरपंथ और सामाजिक तनाव को लेकर पुरानी बहस फिर तेज हो गई है। इटली में भी महंगाई और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन हुए। मिलान में एक रैली के दौरान स्थिति बिगड़ गई और पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। यूरोप के कई देशों में बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है।
इटली में हिंसा के बीच बुर्का-नकाब प्रतिबंध की चर्चा
इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने 24 सितंबर को स्कूलों में बुर्का और नकाब जैसे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने तथा कुछ कक्षाओं में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या सीमित करने संबंधी कदमों को मंजूरी दी थी। सरकार ने इनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में एकीकरण और इतालवी भाषा सीखने को बढ़ावा देना बताया। इसके बाद 17 अक्टूबर को मिलान में महंगाई और युद्धों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू में शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कुछ नकाबपोश लोगों ने पुलिस पर पत्थर और दूसरी वस्तुएं फेंकीं, दुकानों में लूटपाट की और आगजनी की।
पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री मेलोनी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए हिंसा की निंदा की। महत्वपूर्ण बात यह है कि बुर्का-नकाब पर प्रतिबंध और मिलान की हिंसा का समय करीब होने कारण सवाल उठ रहे हैं। फ्रांस में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून 2010 में पारित हुआ था और अप्रैल 2011 से लागू हुआ। प्रदर्शनों के दौरान हिंसा करने वाले समूहों की भूमिका और उनके उद्देश्यों की जांच जरूरी है। फ्रांस के अधिकारियों ने हिंसक घटनाओं के लिए कट्टर वामपंथी समूहों और लूटपाट करने वालों को जिम्मेदार ठहराया है।
