इटली में हिंसा पर चलेगा अब "योगी कानून"; Gen-Z उपद्रवियों के पेरेंट्स से वसूला जाएगा मोटा जुर्माना, 5 साल की जेल भी होगी(Video)
punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 12:22 PM (IST)
Rome: इटली में हिंसक प्रदर्शन, लूटपाट और आगजनी के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। मिलान में हुई हिंसा में करीब 10 लाख यूरो की संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबर है। सरकार ने सुरक्षा के नए नियमों को मंजूरी दी है। इनके तहत हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों को जेल और जुर्माना हो सकता है। नाबालिगों द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता से कराने का भी प्रावधान है। सरकार साल के अंत तक मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगी। इटली में नाबालिगों की जिम्मेदारी, नुकसान की भरपाई और हिंसक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के प्रावधानों की तुलना भारत के उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा अपनाए गए कदमों से की जा रही है।
⚡️Italy's Meloni on protests & penalties: If, during a march or demonstration, you join a group of five or more people and start throwing stones, firecrackers, sticks... you risk up to five years in prison and a fine of up to €20,000. You break it, you pay for it. And if the person who breaks it is a minor, their parents pay. The parents of that kid who had fun smashing everything will have to pay. An additional 500 military personnel will arrive in Milan by the end of the year to support the police and Carabinieri. We will do everything we can to prevent what we have seen in recent days from becoming the new normal. The youngest of the youths identified in Milan was reportedly just 11 years old. 11 years old. It hurts, and it is scary. https://t.co/5lf3knJ90Z
— War Intel (@warintel4u) October 20, 2026
प्रधानमंत्री मेलोनी ने मंगलवार को मिलान में दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाओं के बाद सुरक्षा संबंधी नए उपायों को मंजूरी दी जिसके तहत हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों को 5 साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक जुर्माना हो सकता है। भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 21 लाख रुपए बैठती है। इन उपायों का उद्देश्य हिंसा पर अंकुश लगाना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को जवाबदेह बनाना है। मेलोनी सरकार के नए उपायों में नाबालिगों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत नाबालिगों द्वारा उपद्रव के दौरान किए गए नुकसान की भरपाई उनके माता-पिता से कराने की व्यवस्था शामिल है। इसके अलावा, 14 साल से अधिक उम्र के नाबालिगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आसान बनाने की योजना है।
Meloni vows to hold rioters accountable Italian Prime Minister Giorgia Meloni said throwing stones, firecrackers and sticks during demonstrations carries a penalty of up to five years in prison and a fine of up to €20,000. “Destruction and looting are not protest — they are criminal acts,” Meloni stressed. Parents will be held financially responsible for damage caused by minors. Another 500 troops will be deployed to Milan to support the police.
— NEXTA (@nexta_tv) October 20, 2026
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम उम्र का हवाला देकर हिंसा, लूटपाट और तोड़फोड़ की जिम्मेदारी से बचा न जा सके। हालांकि, माता-पिता की देनदारी और अन्य कानूनी प्रावधानों का वास्तविक दायरा संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा। शनिवार को मिलान में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की, संपत्तियों में आग लगाई और पुलिस के साथ झड़प की। इन घटनाओं में करीब 10 लाख यूरो का नुकसान होने की खबर है। घटना के बाद सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा मजबूत करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। सरकार मिलान में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए साल के अंत तक 500 अतिरिक्त सैनिक तैनात करेगी। इनकी तैनाती का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाना और हिंसक गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है। मेलोनी ने कहा कि मिलान और इटली के अन्य शहरों में हुई हिंसा की तस्वीरें अस्वीकार्य हैं। दुकानों को लूटना, खिड़कियां तोड़ना और सुरक्षा बलों पर हमले करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने हिंसा रोकने और उससे निपटने के लिए नए उपायों वाला आदेश पारित किया है।
नकाब पहनकर उपद्रव करने वालों की भी होगी पहचान
सरकार प्रदर्शन के दौरान नकाब या हुड पहनकर अपनी पहचान छिपाने वालों पर भी शिकंजा कसना चाहती है। मेलोनी के मुताबिक, जैविक पहचान तकनीक और कृत्रिम मेधा की मदद से ऐसे लोगों की पहचान करने के उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।सरकार का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करना और उन्हें कानून के दायरे में लाना जरूरी है। मेलोनी ने प्रदर्शन में कम उम्र के युवाओं की भागीदारी पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, इस बार पारंपरिक रूप से हिंसक प्रदर्शनों में शामिल रहने वाले समूहों के अलावा बड़ी संख्या में युवा भी सड़कों पर पहुंचे, जिनमें कई नाबालिग थे। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि कुछ युवा सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखने के बाद छोटे-छोटे समूहों में वहां पहुंचे थे। उनके अनुसार, इनमें कुछ लोग तोड़फोड़ करने, चोरी करने और घटनाओं के वीडियो बनाने के इरादे से आए थे।मेलोनी ने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से रोकना जरूरी है, ताकि हिंसा और लूटपाट दूसरों के लिए नकल करने का उदाहरण न बन जाए।
