खत्म होने वाली अमेरिका-ईरान जंग ! तीन मोर्चों पर चल रहा खेल, ट्रंप की टाइमिंग पर उठे सवाल

punjabkesari.in Wednesday, Apr 15, 2026 - 12:23 PM (IST)

International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब केवल सैन्य या कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसमें राजनीतिक संदेश और रणनीतिक संकेत भी गहराई से जुड़ गए हैं। इसी संदर्भ में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  का हालिया बयान जिसमें उन्होंने कहा कि युद्ध “खत्म होने के करीब” है एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान सिर्फ स्थिति का आकलन नहीं, बल्कि एक “मनोवैज्ञानिक रणनीति” भी हो सकता है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध ''खत्म होने के करीब'' है और दावा किया कि यदि वह अभी पीछे हट जाएं, तो ईरान को दोबारा खड़े होने में 20 साल लग जाएंगे। हालांकि ट्रंप की कथनी और करनी में हमेशा अंतर रहा है और उनके इस बयान की टाइमिंग पर भी  सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

राष्ट्रपति की यह टिप्पणी उस बयान के कुछ घंटों बाद आयी है, जिसमें 'यूएस सेंट्रल कमांड' ने कहा था कि नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले सभी यातायात को सफलतापूर्वक रोक दिया गया है। साथ ही कहा गया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन कर रहा है। ट्रंप ने 'फॉक्स न्यूज' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ''मुझे लगता है कि यह लगभग खत्म हो चुका है। मैं इसे लगभग समाप्ति के करीब मानता हूं।'' यानी यह बयान जमीनी हकीकत से ज्यादा “नेरेटिव सेट करने” का हिस्सा भी हो सकता है।

 

दूसरी तरफ, US Central Command का दावा है कि ईरान के समुद्री मार्गों और तटीय गतिविधियों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। खासकर Strait of Hormuz पर नियंत्रण की कोशिश वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकती है। इससे साफ है कि जमीनी स्तर पर सैन्य दबाव अभी भी जारी है और स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई है। साथ ही, Islamabad में चल रही कूटनीतिक वार्ताएं इस पूरे संकट का दूसरा अहम पहलू हैं। बातचीत का अगला दौर संभावित है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष सीधे टकराव से बचना चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। ट्रंप के बयान को अगर व्यापक संदर्भ में देखें, तो यह तीन मोर्चों पर चल रहा खेल दिखता है:

 

  • कूटनीतिक दबाव-ईरान को बातचीत में झुकाने की कोशिश
  • सैन्य संदेश-अमेरिका की ताकत और नियंत्रण का प्रदर्शन
  • राजनीतिक लाभ-खुद को निर्णायक नेता के रूप में पेश करना


एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत का दूसरा दौर ''अगले दो दिनों में'' इस्लामाबाद में हो सकता है। उन्होंने 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' से कहा, ''आपको वहीं रहना चाहिए, क्योंकि अगले दो दिनों में कुछ हो सकता है और हम वहां जाने के लिए अधिक इच्छुक हैं।'' ट्रंप ने संभावित दूसरे दौर की बातचीत का श्रेय पाकिस्तानी सेना के चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को देते हुए कहा कि उन्होंने ''बहुत अच्छा काम'' किया है।  हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या उपराष्ट्रपति जेडी वेंस उस वार्ता दल का नेतृत्व जारी रखेंगे, जिसमें व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर शामिल थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या अस्थायी रोक से ईरान समझौता करेगा, तो ट्रंप ने कहा, ''मैं लगातार कहता रहा हूं कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसलिए मुझे 20 साल वाली बात पसंद नहीं है।'' उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि ईरान को यह महसूस हो कि उसने कोई जीत हासिल की है।''

 

  
 
  


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Content Writer

Tanuja

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