ईरान की ट्रंप को सरेआम जान से मारने की धमकी, कहा- “इस बार निशाना नहीं चूकेगा, गोली सिर के आर-पार होगी”(Video)
punjabkesari.in Friday, Jan 16, 2026 - 04:22 PM (IST)
International Desk: ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और उसमें अमेरिका के कथित हस्तक्षेप के बाद ईरान और अमेरिका के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के जवाब में अब ईरान ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। ईरान की सरकारी टेलीविजन पर एक ऐसा फुटेज प्रसारित किया गया, जिसमें ट्रंप को सरेआम जान से मारने की धमकी दी गई है। इस फुटेज में ट्रंप की वह तस्वीर दिखाई गई है, जो 2024 में अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के बटलर शहर में एक चुनावी रैली के दौरान उन पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ी है। तस्वीर के साथ फारसी भाषा में लिखा गया है “इस बार निशाना नहीं चूकेगा और गोली सिर के आर-पार होगी ।”
Iranian state TV airs a death threat to President Trump, translated: "this time the bullet won't miss." pic.twitter.com/GsYffmUzWy
— Tommy Robinson 🇬🇧 (@TRobinsonNewEra) January 14, 2026
यह पोस्टर एक ऐसे युवक के हाथ ोमें दिखाया गया, जो तेहरान में हालिया प्रदर्शनों के दौरान मारे गए ईरानी सुरक्षाकर्मियों के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल था। यह कार्यक्रम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान न्यूज नेटवर्क (IRINN) पर प्रसारित किया गया। समारोह के दौरान कई लोग ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ लिखे बैनर पकड़े हुए थे और कुछ लोग ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें लहराते नजर आए। गौरतलब है कि पेंसिल्वेनिया की जिस घटना का जिक्र पोस्टर में किया गया, उसमें थॉमस क्रूक्स नामक बंदूकधारी ने ट्रंप पर गोली चलाई थी। हालांकि गोली ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी और वह बाल-बाल बच गए थे। इसी घटना को लेकर ईरान के सरकारी प्रसारण में यह संकेत दिया गया कि अगली बार हमला जानलेवा होगा।
ईरान का नाम इससे पहले भी विदेशों में हत्या की साजिशों से जुड़ चुका है। जनवरी 2020 में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद से ईरान लगातार ट्रंप से बदला लेने की कसम खाता रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 2024 में फरहाद शेकेरी नामक व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप की हत्या की एक ईरान-समर्थित साजिश को नाकाम किया गया था। अदालती दस्तावेजों में दावा किया गया कि इस साजिश के पीछे ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) का हाथ था।
