हुक्म-ए-तालिबान: अब बिना मोबाइल के काम करेंगे अफगानिस्तान के सरकारी कर्मचारी, तोड़ा नियम तो जाएंगे सीधा जेल

punjabkesari.in Friday, Jun 19, 2026 - 03:34 PM (IST)

Taliban Smartphone Ban : अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने एक ऐसा अजीबोगरीब और कड़ा कानून लागू किया है जिसने वहां के सरकारी मुलाजिमों की दैनिक जिंदगी और कामकाज को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। तालिबान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) हिबतुल्लाह अखुंदजादा के निर्देश पर देश में सभी सरकारी कर्मचारियों और सुरक्षा बलों के स्मार्टफोन (टचस्क्रीन फोन) इस्तेमाल करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। यह आदेश जून 2026 से पूरे देश में कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

तालिबान की मिलिट्री कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक प्रतीकों वाले आदेश के मुताबिक अब सरकारी दफ्तरों में डिजिटल तकनीक पर पूरी तरह ताला लगाया जा रहा है। आदेश में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर कोई भी छोटा या बड़ा कर्मचारी कार्यालय के अंदर स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया तो उसकी नौकरी तुरंत समाप्त कर दी जाएगी। पकड़े जाने पर कर्मचारी का महंगा स्मार्टफोन जब्त कर सरेआम तोड़ दिया जाएगा।

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इसके अलावा उल्लंघन करने वालों पर मिलिट्री कोर्ट में मुकदमा चलाकर कानूनी और शरिया के तहत कड़ी सजा यानि कि कुछ इलाकों में 6 महीने तक की जेल भी जाना पड़ सकता है। इस नए फरमान के बाद अफगानिस्तान के गज़नी, कंधार, हेरात और बदख्शां जैसे प्रांतों में सरकारी कर्मचारियों ने डर के मारे अपने फोन बंद कर दिए हैं जिससे प्रशासनिक काम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

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अब तक अधिकांश सरकारी विभागों का काम, सूचनाओं का आदान-प्रदान और जरूरी फाइलें व्हाट्सएप ग्रुप्स, ईमेल और ट्रांसलेशन के लिए AI टूल्स के जरिए होती थीं। अचानक फोन बंद होने से ये सभी ग्रुप्स ठप हो गए हैं। स्कूल के शिक्षकों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और क्लर्कों का कहना है कि इस फैसले से रोजमर्रा का कामकाज लगभग असंभव हो गया है। अब उन्हें केवल साधारण वॉयस कॉल (लैंडलाइन या बेसिक फोन) और कागजी फाइलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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जानें तालिबान ने क्यों लगाया स्मार्टफोन पर बैन?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों के अनुसार तालिबान नेतृत्व द्वारा अचानक स्मार्टफोन को बैन करने के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण माने जा रहे हैं:

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सरकारी सूचनाओं का लीक होना (Data Leaks): तालिबान सरकार को डर था कि कर्मचारी अपने स्मार्टफोन से दफ्तरों के गोपनीय दस्तावेजों की तस्वीरें खींच लेते हैं या बैठकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया पर लीक कर रहे हैं।

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव: पिछले कुछ समय से अफगानिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के वीडियो स्थानीय लोगों और कर्मचारियों द्वारा स्मार्टफोन से बनाकर इंटरनेट पर वायरल किए जा रहे थे जिससे तालिबान की वैश्विक स्तर पर किरकिरी हो रही थी। सूचनाओं के इसी प्रवाह को रोकने के लिए इंटरनेट और स्मार्टफोन को ही निशाना बनाया गया है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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