तालिबान की खुली धमकी: “पाकिस्तान को मिटाने के लिए एक दिन का युद्ध ही काफी”, तालिबान के दो मॉडलों से कांपा इस्लामाबाद !
punjabkesari.in Saturday, Feb 28, 2026 - 11:06 AM (IST)
International Desk:अफगानिस्तान के गृहमंत्री Sirajuddin Haqqani ने खोस्त प्रांत में दिए भाषण में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ वही रणनीति अपनाई जो NATO बलों के खिलाफ अपनाई थी, तो “एक दिन भी काफी होगा नक्शा बदलने के लिए।” हालांकि यह बयान एक राजनीतिक और भावनात्मक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
NATO के खिलाफ इस्तेमाल हुआ ‘गुरिल्ला मॉडल’
हक्कानी नेटवर्क ने 20 वर्षों तक NATO और अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ गुरिल्ला और आत्मघाती हमलों की रणनीति अपनाई थी। 2021 में अमेरिकी वापसी के दौरान काबुल में हुए भीषण बम धमाके ने दुनिया को झकझोर दिया था। हक्कानी का इशारा इसी प्रकार की रणनीति की ओर माना जा रहा है, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की।
TTP का ऐलान और बढ़ती चुनौती
इसी बीच Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) के प्रमुख Mufti Noor Wali Mehsud ने भी पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हमलों की बात कही है। TTP का खैबर पख्तूनख्वा में प्रभाव माना जाता है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने अब तक आधिकारिक रूप से इन बयानों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सीमा पर तनाव और सुरक्षा अलर्ट की खबरें सामने आती रही हैं।
दो अलग ‘मॉडल’: खुला युद्ध बनाम छद्म युद्ध
तालिबान के रक्षा मंत्री Mullah Yaqoob जहां पारंपरिक सैन्य तैयारी की बात करते हैं, वहीं हक्कानी का बयान कथित रूप से असममित (asymmetric) रणनीति की ओर इशारा करता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात बिगड़े तो यह संघर्ष पारंपरिक सीमा युद्ध से ज्यादा आतंरिक अस्थिरता का रूप ले सकता है।
क्या बड़ा युद्ध संभव है?
वर्तमान स्थिति में दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज है, लेकिन प्रत्यक्ष युद्ध की संभावना पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान संबंध लंबे समय से अविश्वास और सीमा विवादों से प्रभावित रहे हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो सीमा क्षेत्र में झड़पों और आतंकी गतिविधियों का खतरा बढ़ सकता है, जो पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए चुनौती होगा।
