स्टारशिप V3 समंदर में गिरा और धमाके से फटा, फिर भी NASA और SpaceX ने मनाया जश्न !
punjabkesari.in Saturday, May 23, 2026 - 02:02 PM (IST)
International Desk: एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने दुनिया के सबसे बड़े रॉकेट स्टारशिप के नए वर्जन V3 का बड़ा परीक्षण किया है। इस टेस्ट के दौरान रॉकेट समुद्र में उतरा और फिर जोरदार धमाके के साथ फट गया। हालांकि इसके बावजूद मिशन कंट्रोल में खुशी की लहर दौड़ गई। दरअसल, यह धमाका मिशन की असफलता नहीं माना गया। SpaceX और NASA के अनुसार टेस्ट के मुख्य लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हो गए।
SpaceX completes largely successful test flight of its next-generation Starship rocket, deploying clutch of mock satellites and executing controlled splashdown in Indian Ocean in high-stakes debut of newly upgraded vehicle pic.twitter.com/SuyPtfuP7l
— TRT World Now (@TRTWorldNow) May 23, 2026
क्यों खुश हुआ NASA?
NASA ने कहा कि स्टारशिप V3 का यह टेस्ट इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने और भविष्य में मंगल मिशन के लिए बेहद अहम है। NASA एडमिनिस्ट्रेटर Jared Isaacman ने इसे अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ा कदम बताया। स्टारशिप के नए वर्जन में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें ज्यादा वजन ले जाने की क्षमता, बेहतर रीयूजेबिलिटी, ज्यादा भरोसेमंद सिस्टम, लंबी दूरी के मिशन के लिए सुधार शामिल हैं। NASA का मानना है कि यही तकनीक भविष्य में चंद्रमा और मंगल मिशन की रीढ़ बनेगी।
SpaceX's Starship V3 rocket, the largest and most powerful in history, conducted its first test flight on Friday, with NASA eyeing the rocket as a vehicle for future moon missions pic.twitter.com/cfk6Q7euaa
— The New Region (@thenewregion) May 23, 2026
चांद पर इंसान भेजने की तैयारी
NASA स्टारशिप को अपने Artemis III मिशन में इस्तेमाल करना चाहता है। योजना के मुताबिक, यही स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाएगा। NASA लंबे समय से इंसानों को फिर से चांद पर भेजने की तैयारी कर रहा है और स्टारशिप का यह टेस्ट उसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समुद्र में नियंत्रित लैंडिंग के बाद रॉकेट का अंतिम चरण खत्म होने पर वह टूट गया और विस्फोट हुआ। NASA का कहना है कि अगर स्टारशिप पूरी तरह सफल होता है, तो भविष्य में इंसानों को मंगल ग्रह तक भेजने के मिशन में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक अंतरिक्ष यात्रा की दुनिया बदल सकती है।
