दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ साजिश की परतें खुलीं, 10 सैन्य अधिकारी जांच के घेरे में
punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 03:19 PM (IST)
International Desk: दक्षिण कोरिया में दिसंबर 2024 में घोषित विवादित मार्शल लॉ से जुड़े मामले में जांच तेज हो गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को पुलिस ने राजधानी सियोल में स्पेशल काउंसल कार्यालय पर छापा मारा। यह कार्रवाई न्याय मंत्रालय पर लगे उन आरोपों की जांच का हिस्सा है, जिनमें कहा गया है कि मार्शल लॉ के दौरान जेलों में हिरासत की अतिरिक्त जगह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी। कोरियन नेशनल पुलिस एजेंसी की विशेष जांच टीम ने दक्षिणी सियोल स्थित स्पेशल काउंसल चो यून-सुक के कार्यालय में दस्तावेज़ों और डिजिटल डेटा को जब्त किया। ये वही दस्तावेज़ हैं, जिन्हें पहले स्पेशल काउंसल टीम ने पूर्व न्याय मंत्री पार्क सुंग-जे के खिलाफ छापेमारी के दौरान कब्जे में लिया था।
पुलिस के अनुसार, यह छापा कोरिया करेक्शनल सर्विस के पूर्व प्रमुख शिन योंग-हे से जुड़े मामले में मारा गया। शिन पर आरोप है कि उन्होंने मार्शल लॉ लागू करने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। जांच में सामने आया है कि शिन ने न्याय मंत्री पार्क के निर्देश पर राजधानी क्षेत्र की जेलों में हिरासत क्षमता का आकलन किया था।ॉबताया गया है कि शिन ने रिपोर्ट दी थी कि करीब 3,600 अतिरिक्त बंदियों को मौजूदा जेलों में रखा जा सकता है। स्पेशल काउंसल की जांच में यह भी सामने आया कि शिन ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को कैदियों की संख्या समायोजित करने और पैरोल के विकल्पों पर दस्तावेज़ तैयार करने के निर्देश दिए थे।
पिछले महीने स्पेशल काउंसल टीम ने पार्क सुंग-जे को मार्शल लॉ से जुड़े आरोपों में अभियुक्त बनाया था, जबकि शिन का मामला आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया। इस बीच रक्षा मंत्रालय ने खुलासा किया है कि पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के असफल मार्शल लॉ प्रयास में कथित रूप से शामिल करीब 10 सैन्य अधिकारियों को विशेष रक्षा जांच इकाई को सौंपा जाएगा। इन अधिकारियों पर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ में मार्शल लॉ सिचुएशन रूम स्थापित करने और नेशनल इलेक्शन कमीशन में रक्षा खुफिया कर्मियों की तैनाती से जुड़े आरोप हैं। सरकार ने साफ किया है कि जांच के नतीजों के आधार पर इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सेना की विश्वसनीयता बहाल करने और मार्शल लॉ प्रकरण के बाद सैन्य ढांचे में सुधार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।
