रूस की ''स्पेस स्ट्राइक'' से यूरोप में हड़कंप: रूसी सैटेलाइट्स ने GPS सिग्नल किए जाम, विमानों और जहाजों के लिए बढ़ा खतरा

punjabkesari.in Monday, Jun 08, 2026 - 12:30 AM (IST)

बर्लिन/लंदन: वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि रूसी सैटेलाइट्स यूरोप के कई हिस्सों में जीपीएस (GPS) सिग्नलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इस खुलासे ने उन प्रणालियों की संवेदनशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर रोजाना करोड़ों लोग निर्भर हैं।

युद्ध का नया मैदान बना अंतरिक्ष
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस एट ऑस्टिन द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र के अनुसार, ये घटनाएं दिखाती हैं कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरिक्ष आधारित तकनीक अब युद्ध का नया मैदान बनती जा रही है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि रूस से जुड़ी इन गतिविधियों के कारण यूरोप के कई क्षेत्रों में नेविगेशन सिग्नलों में गड़बड़ी देखी गई है, जिसका सीधा असर विमानों और समुद्री जहाजों पर पड़ रहा है।

नेविगेशन में आ रही भारी बाधा
रिपोर्ट के मुताबिक, इन व्यवधानों के तहत सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नलों को दबाने या उन्हें विकृत (Distort) करने की कोशिश की जाती है। इससे जमीन पर मौजूद रिसीवरों के लिए सटीक स्थान का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीपीएस केवल स्मार्टफोन मैप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्दे के पीछे बहुत बड़ी भूमिका निभाता है; ऐसे में एक मामूली सी बाधा भी बड़े परिचालन संकट और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को जन्म दे सकती है।

डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर
जानकारों का मानना है कि ये घटनाएं इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (Electronic Warfare) के बढ़ते चलन का हिस्सा हैं। अब देश केवल पारंपरिक सैन्य हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल और अंतरिक्ष-आधारित बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। विशेष रूप से 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से संवेदनशील इलाकों और युद्ध क्षेत्र के करीब के हिस्सों में जीपीएस व्यवधानों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि भौतिक हमलों की तुलना में सिग्नल हस्तक्षेप को तुरंत ट्रैक करना काफी कठिन होता है।

सुरक्षा के लिए बैकअप की तैयारी
इन बढ़ते खतरों को देखते हुए यूरोपीय अधिकारी और सुरक्षा विशेषज्ञ अब बैकअप नेविगेशन सिस्टम और ऐसी तकनीकों की तलाश कर रहे हैं जो इन हस्तक्षेपों का तेजी से पता लगा सकें। चूंकि आज दुनिया नागरिक और सैन्य दोनों कार्यों के लिए सैटेलाइट्स पर पूरी तरह निर्भर है, इसलिए भविष्य में अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी प्राथमिकता बनने वाला है।


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Content Writer

Pardeep

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