ईरान की अमेरिका को खुली धमकी: हमला हुआ तो इजराइल तक सारे सैन्य बेस कर देंगे तबाह, प्रदर्शनकारियों को देंगे फांसी

punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 02:25 PM (IST)

International Desk: ईरान में इस्लामी शासन को चुनौती देते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं। राजधानी तेहरान, दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद और कई अन्य इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। ईरान में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन सेवाएं पूरी तरह बंद हैं, जिससे वास्तविक हालात की जानकारी बाहर पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। विदेशों में आशंका जताई जा रही है कि सूचना ब्लैकआउट का फायदा उठाकर ईरानी सुरक्षा बल निर्मम कार्रवाई कर सकते हैं।

 

इसी बीच, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ ने अमेरिका और इजरायल को सीधी धमकी दी। संसद में “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारों के बीच उन्होंने कहा,“अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इजरायल और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने हमारे वैध लक्ष्य होंगे।” क़ालीबाफ ने यह भी कहा कि ईरान सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खतरे के संकेत मिलते ही पहले भी हमला कर सकता है। हालांकि किसी भी युद्ध का अंतिम फैसला 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथ में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कहा है कि अमेरिका ईरान के लोगों के साथ खड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप से खेल मत खेलिए, वह जो कहते हैं, करके दिखाते हैं।”

 

न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को ईरान पर हमले के सैन्य विकल्प सौंपे गए हैं, हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। तेहरान के पुनाक इलाके में हजारों लोग सड़कों पर मोबाइल की रोशनी जलाकर प्रदर्शन करते दिखे, जबकि मशहद में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। कूड़ेदानों में आग लगाई गई और सड़कों को जाम किया गया। मशहद में स्थित इमाम रज़ा दरगाह के कारण वहां के प्रदर्शन शासन के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों और उनकी मदद करने वालों को “ईश्वर का दुश्मन” माना जाएगा  यह आरोप मृत्युदंड तक ले जा सकता है। ये विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को तब शुरू हुए थे, जब ईरानी मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से नीचे चली गई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव में पहले से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था ने आग में घी का काम किया।

 


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Content Writer

Tanuja

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