‘शुद्ध शून्य’ उत्सर्जन का और कंपनियों ने लिया संकल्प, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ क्या है

09/22/2021 10:22:51 AM

इंडियाना विश्वविद्यालय की बिजनेस सस्टेनेबिलिटी लैब के कार्यकारी निदेशक और ऑपरेशंस मैनेजमेंट के सहायक प्रोफेसर अमरौ अवेशेह
वॉशिंगटन, 21 सितंबर (द कन्वरसेशन) जब सरकारी नेता और कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जलवायु परिवर्तन पर अपने देशों के कारोबार के असर को कम करने के तरीकों पर बात कर रहे हैं, तो आप आगामी सप्ताहों में उनके मुंह से ‘शुद्ध शून्य (नेट जीरो) उत्सर्जन’ शब्द संभवत: कई बार सुन सकते हैं।

उदाहरण के लिए अमेजन ने हाल में घोषणा की कि 2040 तक ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन’ का लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता के तहत उसकी ‘क्लाइमेट प्लेज’ (जलवायु संकल्प) से 200 से अधिक कंपनियां जुड़ी हैं, लेकिन ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन’ का वास्तव में अर्थ क्या हैं?
‘शून्य उत्सर्जन’ का अर्थ होता है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बिल्कुल समाप्त होना, लेकिन ‘शुद्ध शून्य उत्सर्जन’ चेकबुक में हिसाब-किताब को बराबर करने जैसा है।
कोई देश या कंपनी दक्षता एवं स्वच्छ ऊर्जा के जरिए अपने अधिकतर उत्सर्जन को कम करती है और फिर कार्बन डाईऑक्साइड को वातावरण से हटा कर या अन्य स्थानों से उत्सर्जन समाप्त करके बाकी का काम करती है।

उदाहरण के तौर पर, पेड़ हवा से कार्बन डाईऑक्साइड अवशोषित करते हैं, इसलिए उन्हें अक्सर ‘‘नकारात्मक उत्सर्जन’’ समझा जाता है। छोटा हिमालयी देश भूटान शुद्ध शून्य उत्सर्जन का दावा कर सकता है क्योंकि उसकी लगभग सारी बिजली जल विद्युत से आती है, और उसके वन वाहनों, कारखानों और अन्य मानव गतिविधियों से पैदा कार्बन से करीब तीन गुणा अधिक अवशोषित करते हैं।

कंपनियों के पास शुद्ध शून्य उत्सर्जन का एक और तरीका है तथा वे कहीं और कार्बन कटौती का लाभ उठा सकती हैं और कार्बन क्रेडिट हासिल कर सकती हैं। उदाहरणार्थ, कोई अमेरिकी कंपनी दक्षिण अमेरिका के जंगलों की रक्षा के लिए भुगतान कर सकती है और उन पेड़ों से होने वाले नकारात्मक उत्सर्जन को अपनी कंपनी से होने वाले उत्सर्जन से घटा कर यह कह सकती है कि उसका संचालन ‘शुद्ध शून्य’ उत्सर्जन के अनुरूप है। इसके अलावा गरीब देशों में पवन एवं सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर भी कंपनियां इसी प्रकार का लाभ पा सकती हैं।

लेकिन कार्बन क्रेडिट के आधार पर अपना उत्सर्जन शुद्ध शून्य करने पर ही निर्भर रहने की आलोचना होती है, क्योंकि इसके कारण ये कंपनियां ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करना जारी रखती हैं। इसके अलावा एक ही परियोजना में कई कंपनियां योगदान देने का दावा करके लाभ ले सकती हैं।

पेड़ लगाने जैसी कई परियोजना के फलस्वरूप उत्सर्जन में कटौती करने में वर्षों लग सकते है, लेकिन कंपनियों को इस योजना का लाभ अभी से मिलने लगता है और वे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जारी रखती हैं।
शुद्ध-शून्य उत्सर्जन मायने क्यों रखता है?
ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी की सतह के पास गर्मी को रोक लेती हैं। जब उनकी सांद्रता बहुत अधिक हो जाती है, तो वे ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा देती हैं।

2015 में, दुनिया भर के देशों ने ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व औद्योगिक काल के मुकाबले दो डिग्री सेल्सियस (3.6 फेरोनहाइट) से नीचे तक सीमित करने पर सहमति व्यक्त की। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कम से कम व्यवधान के साथ 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान को बनाए रखने के लिए दुनिया को लगभग 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन तक पहुंचने की राह पर चलने की जरूरत है। इन तापमानों को परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, आज ग्लोबल वार्मिंग पूर्व औद्योगिक स्तरों से एक डिग्री सेल्सियस (1.8 फोरेनहाइट) ऊपर है और समुद्र में बढ़ता जलस्तर और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां पहले से ही एक समस्या हैं।

अमेरिका सहित कई देशों ने 2050 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने सितंबर के मध्य में जब पेरिस समझौते के तहत प्रत्येक देश की प्रतिबद्धताओं का विश्लेषण किया, तो पाया कि वे देश इस मामले में अब भी बहुत पीछे हैं और यदि प्रत्येक प्रतिज्ञा पूरी हो जाती है, तो भी इस सदी में तापमान लगभग 2.7 सेल्सियस बढ़ जाएगा।

कोई कंपनी शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य कैसे प्राप्त करती है
कोई कंपनी शुद्ध-शून्य उत्सर्जन कैसे प्राप्त कर सकती है, यह जानने के लिए आइए एक काल्पनिक कंपनी, चिप-को की कल्पना करें, जो आलू के चिप्स बनाती है, उन्हें पैक करती है और वितरित करती है। चिप-को अपने कारखाने में मशीनरी चलाने के लिए एक स्थानीय बिजली उत्पादन इकाई से बिजली खरीदती है।

इसमें इमारत को गर्म करने और कुछ उत्पादन प्रक्रियाओं के लिए भाप उत्पन्न करने के लिए बॉयलर भी हैं और यह अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए ट्रक का भी उपयोग करती है। प्रत्येक चरण ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करता है।

शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए, चिपको का पहला कदम ऊर्जा दक्षता को बढ़ाना होगा। दूसरा कदम मानव जनित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत जीवाश्म ईंधन के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा इस्तेमाल करना है।

चिपको का तीसरा कदम नकारात्मक उत्सर्जन के स्रोत ढूंढना होता है। चिपको कार्बन क्रेडिट खरीदकर भी अपना लक्ष्य पूरा कर सकती है।

कंपनियां पर अपने उत्सर्जन में कटौती करने के लिए सरकारों, कार्यकर्ताओं और उनके ग्राहकों के साथ-साथ कुछ शक्तिशाली निवेशकों का बहुत दबाव है।

कोई कंपनी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रही है या नहीं, यह पता करने के लिए कंपनी की कार्य योजना और अब तक के उसके प्रदर्शन को देखना चाहिए। यदि कोई कंपनी 2030 में शुद्ध-शून्य लक्ष्य की घोषणा करती है, तो वह कार्रवाई करने के लिए 2029 तक इंतजार नहीं कर सकती।
द कन्वरसेशन सिम्मी शाहिद शाहिद 2109 1456 वाशिंगटन

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