अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई से ईरान में दहशत, ईरानी मौलवी बोले-" खामेनेई की जान खतरे में...कृपया दुआ करें !"
punjabkesari.in Wednesday, Jan 07, 2026 - 11:32 AM (IST)
International Desk: प्रदर्शनों से जूझ रहा ईरान इस समय किसी घरेलू मुद्दे से ज्यादा एक दूर देश वेनेजुएला को लेकर चिंतित है। वजह है अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया जाना। मादुरो लंबे समय से ईरान के करीबी सहयोगी रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया और अधिकारी इस अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा कर रहे हैं, लेकिन आम लोगों और यहां तक कि कुछ आधिकारिक हलकों में भी एक सवाल तेजी से फैल रहा है क्या अमेरिका इसी तरह ईरान के शीर्ष नेताओं, यहां तक कि सर्वोच्च नेता 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई को भी निशाना बना सकता है? यह आशंका उस व्यापक डर से जुड़ी है, जिसमें ईरानी जनता को लगता है कि अमेरिका का करीबी सहयोगी इज़राइल फिर से ईरान पर हमला कर सकता है। जून में हुए 12 दिनों के युद्ध में इज़राइल ने कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों और परमाणु वैज्ञानिकों को मार गिराया था, जबकि अमेरिका ने ईरान के परमाणु संवर्धन ठिकानों पर बमबारी की थी। माना जाता है कि इसके बाद खामेनेई सुरक्षा कारणों से छिप गए थे।
‘कृपया दुआ करें’
रविवार रात तेहरान विश्वविद्यालय में नमाज़ के दौरान प्रमुख मौलवी अयातुल्ला मोहम्मद अली जावेदान ने कहा, “किसी ने कहा कि उसने एक बुरा सपना देखा है, जिसमें नेता खामेनेई की जान खतरे में है। कृपया दुआ करें।” विश्लेषकों के अनुसार, ईरान वेनेजुएला से लगभग दोगुना बड़ा है और उसकी सेना व सुरक्षा तंत्र कहीं ज्यादा मजबूत है। इसके अलावा 1979 में अमेरिकी दूतावास संकट के दौरान बंधकों को छुड़ाने की नाकाम अमेरिकी कार्रवाई ‘ऑपरेशन ईगल क्लॉ’ की याद आज भी वॉशिंगटन को डराती है। तेहरान के 57 वर्षीय शिक्षक सईद सैयदी कहते हैं, “ईश्वर हमारे नेता की रक्षा करे, हमें भी सतर्क रहना चाहिए। अमेरिका पहले भी ईरान के खिलाफ साजिशें करता रहा है खासतौर पर जब तेल, इज़राइल, रूस-यूक्रेन युद्ध और हिज़्बुल्लाह जैसे मुद्दे जुड़े हों।”
ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह पर भी ड्रग तस्करी के आरोप
अमेरिका लंबे समय से ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह पर ड्रग तस्करी के आरोप लगाता रहा है, हालांकि हिज़्बुल्लाह इन आरोपों से इनकार करता है।मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ईरानी सरकारी टीवी पर एक विश्लेषक ने बिना सबूत दावा किया कि अमेरिका और इज़राइल ने पिछले साल युद्ध के दौरान दोहरी नागरिकता वाले ईरानियों की मदद से ईरानी नेताओं को अगवा करने की योजना बनाई थी। यहां तक कि साजिशों के लिए मशहूर ईरानी टीवी पर भी ऐसा दावा असामान्य माना जा रहा है। वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ फारज़िन नदीमी का कहना है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स सीधे खामेनेई को जवाबदेह हैं और वे जवाबी कार्रवाई में हत्याएं, साइबर हमले और मध्य-पूर्व में जहाजों पर हमले कर सकते हैं। सबसे अहम बात यह है कि ईरान के पास अब भी परमाणु सामग्री मौजूद है।
ट्रंप ने चेतावनी दी
दुनिया के अन्य हिस्सों में भी यह सवाल उठ रहा है कि अमेरिका अगला कदम कहां उठाएगा। इज़राइल के विपक्षी नेता यायर लापिद ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरानी शासन को वेनेजुएला की घटनाओं से सबक लेना चाहिए। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सीधे मादुरो की गिरफ्तारी को ईरान से नहीं जोड़ा, लेकिन कहा कि ईरानी जनता अपने भविष्य का फैसला खुद करने के मोड़ पर हो सकती है। उधर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक तरीके से कुचला, तो अमेरिका “उनकी मदद के लिए आगे आएगा।” ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप और नेतन्याहू के बयानों को “हिंसा और आतंक को उकसाने वाला” करार दिया। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने “Make Iran Great Again” टोपी पहनकर बयान दिया, जबकि सऊदी अरब के एक प्रमुख अखबार ने लिखा कि मादुरो की गिरफ्तारी ईरान के सर्वोच्च नेता के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
