बेरोज़गारी ने पाकिस्तान को दोहरे संकट में डाला, रोजगार नहीं तो अशांति और पलायन तय: रिपोर्ट

punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 05:35 PM (IST)

Islamabad: पाकिस्तान बढ़ती बेरोज़गारी के कारण दोहरे संकट का सामना कर रहा है। एक तरफ देश के भीतर सामाजिक अशांति का खतरा बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर तेजी से हो रहा पलायन (Migration) पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और मानव संसाधन को कमजोर कर रहा है। यह चेतावनी एक नई रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले 10 वर्षों में पाकिस्तान को 25 से 30 मिलियन नौकरियां पैदा करनी होंगी, यानी हर साल करीब 25 से 30 लाख नौकरियां। लेकिन देश की कमजोर अर्थव्यवस्था, नीतिगत अनिश्चितता और निजी क्षेत्र की सुस्ती के चलते इतने बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना मुश्किल नजर आ रहा है।

 

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अगर आर्थिक असमानता और गहराई, तो और ज्यादा युवा पाकिस्तान छोड़कर विदेशों में काम की तलाश करेंगे, जिससे देश की मानव पूंजी खोखली हो जाएगी। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने हाल ही में कहा था कि अगर पाकिस्तान ने तुरंत और लगातार रोजगार सृजन पर ध्यान नहीं दिया, तो वह आर्थिक लाभ देने वाले देश के बजाय अस्थिरता का स्रोत बन सकता है। रिपोर्ट में बताया गया कि हालात के संकेत पहले से दिख रहे हैं। सिर्फ 2025 में करीब 4,000 डॉक्टरों ने पाकिस्तान छोड़ दिया, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है। बेहतर कामकाजी माहौल और करियर की संभावनाओं की कमी के कारण प्रशिक्षित पेशेवर देश में टिकना नहीं चाहते।

 

इस समय पाकिस्तान IMF के स्थिरीकरण कार्यक्रम के तहत काम कर रहा है और साथ ही विश्व बैंक के 10 साल के कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क को लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत हर साल लगभग 4 अरब डॉलर की फंडिंग का अनुमान है। इस योजना में माना गया है कि सरकार के पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं और देश में 90 प्रतिशत नौकरियां निजी क्षेत्र देता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान में फ्रीलांसर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो उद्यमशीलता की क्षमता दिखाती है। लेकिन क्रेडिट की कमी, कमजोर ढांचा और जटिल नियमों के कारण बहुत कम लोग अपनी फर्म को बड़ा बना पाते हैं। वित्त मंत्रालय की जनवरी 2026 की आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 7.6 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी रोजगार के लिए देश छोड़कर गए। साथ ही निर्यात, विदेशी निवेश (FDI) और आर्थिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन कमजोर रहा।

 


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Content Writer

Tanuja

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