PoJK कार्यकर्ता ने पाकिस्तान के “कश्मीर सॉलिडैरिटी डे की खोली पोल, कहा- यह सिर्फ “प्रोपेगैंडा ”

punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 04:11 PM (IST)

International Desk: हर साल 5 फरवरी को पाकिस्तान कश्मीर सॉलिडैरिटी डे मनाता है। आधिकारिक तौर पर यह कश्मीरियों के अधिकारों के लिए एक दिन बताया जाता है, लेकिन पाकिस्तान-के-कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अय्यूब मिर्जा इसे “धोखाधड़ी” और “प्रोपेगैंडा” कहते हैं। उनके अनुसार यह दिन पाकिस्तान की अपनी मानवाधिकारों की स्थिति और शासन की विफलताओं को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। मिर्जा ने एक वीडियो बयान में कहा कि कश्मीर सॉलिडैरिटी डे की शुरुआत 1990 में हुई थी, जब जमात-ए-इस्लामी के नेता काजी हुसैन अहमद ने इसे शुरू किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इसे मंजूरी दी। यह घोषणा कश्मीरी पंडितों के वैली से निर्वासन के कुछ ही हफ्ते बाद हुई थी, जिससे मिर्जा को शक है कि इसका मकसद उस समय की हिंसा और पंडितों के पलायन पर ध्यान हटाना था।

 

PoJK और PoGB में मानवाधिकारों की स्थिति बेहाल
मिर्जा का दावा है कि पाकिस्तान इस दिन का उपयोग PoJK और Gilgit-Baltistan (PoGB) में अपनी मानवाधिकार हनन, भ्रष्ट शासन और संसाधनों की लूट को छुपाने के लिए करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पाकिस्तान कश्मीरियों के अधिकारों को लेकर चिंतित है, तो फिर PoJK और PoGB में मानवाधिकारों की स्थिति पर क्यों नहीं बात करता? मिर्जा ने कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर में भारी निवेश कर रहा है । नए एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय, रेलवे नेटवर्क, और दुनिया का सबसे ऊँचा पुल (Chenab Rail Bridge) जैसी परियोजनाएं चल रही हैं। वहीं PoJK में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और उद्योग की हालत खराब है। उन्होंने कहा, “भारत ने कश्मीर में कितनी प्रगति की, तो पाकिस्तान PoJK में क्या दिखा सकता है?”

 

संसाधन लूट का आरोप
मिर्जा ने आरोप लगाया कि PoJK के प्राकृतिक संसाधनों की लूट होती है। उन्होंने कहा कि जंगलों का क्षेत्रफल दशकों में 40% से घटकर 14% से भी कम हो गया है। 2005 के भूकंप में होने वाली तबाही को भी उन्होंने इसी पर्यावरणीय विनाश से जोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि PoJK से सालाना अरबों रुपये के औषधीय जड़ी-बूटियां बिना मुआवजा दिए निकाल ली जाती हैं और लकड़ी की तस्करी भी बड़ी मात्रा में होती है। मिर्जा ने कहा कि जनता के गुस्से के कारण Joint Awami Action Committee के नेतृत्व में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए, जिन पर सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। उन्होंने दावा किया कि Punjab Police, Rangers और SSG कमांडो को भी Muzaffarabad में विरोध को दबाने के लिए भेजा गया।

 

अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहरा मापदंड
मिर्जा ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत की आलोचना करता है, लेकिन PoJK और PoGB में लोगों को आज़ादी की सीमाएं, पहचान पत्र जब्त, और गांवों में कैद जैसी परेशानियां हैं। मिर्जा ने 5 फरवरी को “हाइपोक्रेसी का प्रतीक” बताया और कहा कि यह दिन पाकिस्तानी सेना को “कश्मीर की रक्षा करने वाला” दिखाने की कोशिश है। उन्होंने फिर से यह दावा किया कि जम्मू-कश्मीर ने 26 अक्टूबर 1947 को भारत से “इंस्टूमेंट ऑफ एक्सेसन” पर हस्ताक्षर कर भारत में शामिल होने का निर्णय लिया था। अंत में मिर्जा ने कहा कि PoJK में अब बहुत से लोग कश्मीर सॉलिडैरिटी डे नहीं मानते। वे मानते हैं कि PoJK को ही अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की जरूरत है, क्योंकि भारतीय प्रशासन वाले क्षेत्र की तुलना में PoJK और PoGB में विकास बहुत कम है।

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Tanuja

Related News