पाकिस्तान को EU का झटका, खतरे में GSP+ का दर्जा, छिन सकती है अरबों की व्यापारिक छूट

punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 01:14 PM (IST)

Pakistan EU Trade Relations : पाकिस्तान ने GSP+ योजना के तहत यूरोपीय संघ (EU) के बाजार में विशेष पहुंच का भरपूर लाभ उठाया लेकिन इसके बदले में जिन सुधारों को लागू करना था, वह ऐसा करने में विफल रहा। इस्लामाबाद अपने वादों को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रहा है। पाकिस्तान का GSP+ दर्जा अब सुरक्षित नहीं है क्योंकि नए ढांचे में पात्रता की एक नई और संभवतः अधिक सख्त शर्त जोड़ दी गई है।

यूरोपीय संघ (EU) ने इस बात पर चिंता जताई है कि GSP+ से भारी लाभ उठाने के बावजूद, पाकिस्तान ने कोई सकारात्मक प्रगति नहीं की है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में तो स्थिति और खराब हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान भविष्य में GSP के नए ढांचे के तहत मिलने वाले व्यापारिक लाभों को बनाए रख पाएगा? इस बात का बड़ा खतरा है कि वह इन लाभों को खो सकता है क्योंकि अब तक की अधिकांश प्रगति केवल प्रशासनिक और विधायी स्तर पर ही रही है, जिसका ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं दिखा है।

क्या है GSP+ और क्यों बढ़ी पाकिस्तान की चिंता ?
EU ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था में एक बुनियादी कमजोरी पाई है। सेना का बढ़ता प्रभाव, चुनावों में धांधली, विपक्ष पर कार्रवाई और संस्थाओं को कमज़ोर करने जैसी घटनाओं ने देश की व्यवस्था से लोगों का भरोसा डिगा दिया है। इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। पाकिस्तान ने कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर सहमति तो जताई है लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े इन वादों को कभी भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया।

पाकिस्तान में नागरिक और मौलिक अधिकार गंभीर खतरे में हैं। लोगों को अपनी बात खुलकर कहने की आज़ादी नहीं है, और विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। कश्मीर क्षेत्र में जो कुछ हुआ, वह इसका एक बड़ा सबूत है। इसके अलावा, लोगों के अचानक गायब हो जाने और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और दोषियों को कभी जवाबदेह नहीं ठहराया गया। EU ने यातना के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। इस्लामाबाद अपने नागरिकों को एक स्वतंत्र, सम्मानजनक और भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार देने की अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है।

मानवाधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उठे सवाल
पाकिस्तान के प्रदर्शन का आकलन करने वाली अपनी ताजा रिपोर्ट में, EU ने कहा है, "अभी भी गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं, जिनका असर कानून के शासन और नागरिक समाज की जगह पर पड़ रहा है। हाल ही में किए गए संवैधानिक संशोधनों की आलोचना हो रही है, क्योंकि इनसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कमज़ोर हुई है। इसके साथ ही, निष्पक्ष सुनवाई में बाधाएं और न्याय तक पहुंच न होना जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। बड़ी संख्या में लोग अभी भी जबरन मजदूरी का शिकार हो रहे हैं। गौरतलब है कि 2024 में पाकिस्तान ने यूरोप को GSP+ के तहत आने वाले 7.5 अरब यूरो मूल्य के सामान का निर्यात किया, जबकि उसे टैरिफ में लगभग 732 मिलियन यूरो की छूट मिली। EU ने पाकिस्तान से मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने, यातना और लोगों के जबरन गायब किए जाने को रोकने के प्रयास तेज करने, और महिलाओं के खिलाफ हिंसा, बाल विवाह तथा अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए कहा है। पाकिस्तान में शासन-व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी समस्या यह है कि सार्वजनिक संस्थानों, खासकर सेना की बहुत कम जांच-पड़ताल होती है, जबकि उनके द्वारा किए गए उल्लंघनों के स्पष्ट उदाहरण सामने आते रहे हैं।

पाकिस्तान के मामले में एक मुख्य कमजोरी यह है कि उसके वादों और जमीनी स्तर पर किए जा रहे वास्तविक प्रयासों के बीच भारी विरोधाभास है। अब वह केवल वादों के ज़रिए EU को संतुष्ट नहीं कर पाएगा, उसे ठोस परिणाम दिखाने होंगे। EU के निष्कर्षों ने पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बजा दी है कि अगर कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो उसे मिलने वाली विशेष व्यापारिक छूट खत्म हो सकती है।

इस बात का प्रबल जोखिम है कि पाकिस्तान अपना GSP+ दर्जा खो देगा, क्योंकि EU द्वारा मांगे गए सुधार लागू नहीं किए जा सके हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये सुधार राजनीतिक अभिजात वर्ग और शक्तिशाली सेना के हितों के लिए खतरा हैं। कमज़ोर नागरिक सरकार, नुकसानदेह संवैधानिक बदलाव और नागरिकों पर लगाई गई पाबंदियां पाकिस्तानी सेना की ताकत का स्रोत हैं, इसलिए GSP+ योजनाओं के तहत सुझाए गए सुधार उनके हितों के खिलाफ जाते हैं। यह सबसे बुनियादी और बड़ी बाधा है।

इस्लामाबाद उन लोगों को कैसे जवाबदेह ठहरा सकता है जो गैर-न्यायिक हत्याओं और लोगों को जबरन गायब करने के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि शक की सुई हमेशा सेना की ओर ही उठती है? न्यायिक स्वतंत्रता एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें EU चाहता है कि पाकिस्तान सुधार करे। लेकिन इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने न्यायपालिका को कमज़ोर करके किस तरह असीमित शक्तियां और कानूनी कार्रवाई से छूट हासिल कर ली है। पाकिस्तान के लिए GSP+ दर्जे को नवीनीकृत करने की EU की चेकलिस्ट में न्यायिक सुधारों का मुद्दा निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

जबरन मजदूरी और बाल मजदूरी पर भी चिंता
एक और अहम क्षेत्र श्रमिकों के अधिकार हैं। EU ने पाया है कि पाकिस्तान ने संबंधित कानून तो बनाए हैं लेकिन उन्हें लागू करने में विफल रहा है। नतीजतन, पूरे पाकिस्तान में जबरन मजदूरी और बाल मजदूरी जैसी प्रथाएं आज भी मौजूद हैं। गहरी गरीबी और सामाजिक बुराइयों के कारण जबरन मजदूरी या बाल मजदूरी का आसानी से खत्म होना मुश्किल है और ऊपर से इस्लामाबाद का रवैया भी लापरवाही भरा दिखता है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान केवल शर्तों का औपचारिक पालन दिखाकर काम नहीं चला सकता, उसे ठोस और मापने योग्य परिणाम दिखाने होंगे। इन सब बातों ने पाकिस्तान के लिए स्थिति को निश्चित रूप से कठिन बना दिया है।


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Content Editor

Prachi Sharma

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