ईरानी प्रदर्शनकारियों के सीधे सिर में मारी गई गोली ! 16 हजार से अधिक की मौत, डॉक्टरों की रिपोर्ट से दुनिया स्तब्ध
punjabkesari.in Sunday, Jan 18, 2026 - 07:08 PM (IST)
International Desk: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर और परस्पर विरोधी दावे सामने आए हैं। शुरुआत में महंगाई और रियाल की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन जल्द ही सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गए, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए गए। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कड़ी कार्रवाई में 16,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हुई और 3 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए। इन दावों के अनुसार अधिकांश पीड़ित 30 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं और कई मामलों में सिर, गर्दन और छाती में गोली लगने की बात कही गई है। जमीन पर मौजूद डॉक्टरों के हवाले से तैयार इन रिपोर्टों में सैन्य-ग्रेड हथियारों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया है।
जर्मन-ईरानी नेत्र सर्जन प्रोफेसर अमीर परस्ता ने हालात को “डिजिटल अंधेरे के कवर में नरसंहार” करार दिया है। तेहरान के प्रमुख अस्पतालों के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि हजारों आंखों की चोटें दर्ज हुईं, जिनमें 700 से 1,000 लोगों ने अपनी आंखें खो दीं। कुछ मामलों में रक्त की कमी से मौत का आरोप भी लगाया गया है, जहां कथित तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने अब तक लगभग 3,300 मौतों की पुष्टि की है और 24,000 से अधिक गिरफ्तारियों की बात कही है। वहीं, कुछ ईरानी अधिकारियों ने कुल मौतों की संख्या करीब 5,000 बताई है, जिनमें लगभग 500 सुरक्षा बलों के जवान शामिल बताए गए हैं। यह अशांति 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे घातक मानी जा रही है।
ईरानी सरकार ने हिंसा के लिए “आतंकवादियों और हथियारबंद दंगाइयों” को जिम्मेदार ठहराया है। सुप्रीम लीडर खामेनेई ने कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन दोषियों को सजा दी जाएगी। न्यायपालिका ने ‘मोहरेब’ जैसे गंभीर अपराधों में फांसी की संभावना भी जताई है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों की हत्या और सामूहिक फांसी जारी रहने पर हस्तक्षेप की चेतावनी दी है। ट्रंप ने नए नेतृत्व की जरूरत पर जोर दिया, जबकि खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल पर हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया है। कुर्द बहुल उत्तर-पश्चिमी इलाकों में हिंसा सबसे ज्यादा बताई जा रही है। कई हफ्तों से जारी इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण हालात की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल बनी हुई है। सख्त कार्रवाई के बाद प्रदर्शनों की रफ्तार भले धीमी पड़ी हो, लेकिन ईरान का आंतरिक संकट अब भी अनिश्चित बना हुआ है।
