नए साल के पहले दिन भूकंप के झटकों से कांपी इस देश की धरती, रिक्टर स्केल पर इतनी रही तीव्रता
punjabkesari.in Thursday, Jan 01, 2026 - 08:58 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः नए साल के पहले दिन म्यांमार में गुरुवार शाम को भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मापी गई। भूकंप भारतीय समयानुसार शाम 6 बजकर 48 मिनट पर आया और इसकी गहराई जमीन के भीतर करीब 10 किलोमीटर थी।
NCS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप का केंद्र म्यांमार में 22.79 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 95.90 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। फिलहाल इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं आई है।
इससे पहले भी म्यांमार में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। NCS के अनुसार, सोमवार को म्यांमार में 3.9 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। यह भूकंप 29 दिसंबर 2025 की रात 9 बजकर 00 मिनट पर दर्ज किया गया था। उस भूकंप का केंद्र 25.75 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 96.50 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था, जबकि इसकी गहराई करीब 130 किलोमीटर बताई गई थी।
म्यांमार भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील देश माना जाता है। इसकी वजह यह है कि म्यांमार चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों—भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट—के बीच स्थित है। इन प्लेटों की आपसी गतिविधियों के कारण यहां अक्सर मध्यम से लेकर तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। इसके अलावा, देश की लंबी समुद्री तटरेखा के कारण सुनामी का खतरा भी बना रहता है।
म्यांमार से होकर करीब 1,400 किलोमीटर लंबा एक बड़ा ट्रांसफॉर्म फॉल्ट गुजरता है, जिसे सागाइंग फॉल्ट कहा जाता है। यह फॉल्ट अंडमान स्प्रेडिंग सेंटर को उत्तर में स्थित टकराव क्षेत्र से जोड़ता है। सागाइंग फॉल्ट की वजह से सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून जैसे बड़े शहरों में भूकंप का खतरा ज्यादा रहता है। ये इलाके म्यांमार की कुल आबादी का करीब 46 प्रतिशत हिस्सा हैं।
हालांकि यांगून शहर इस फॉल्ट लाइन से कुछ दूरी पर है, लेकिन वहां जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने के कारण खतरा बना रहता है। इतिहास में भी इसके उदाहरण मिलते हैं। साल 1903 में बागो में आए 7.0 तीव्रता के एक शक्तिशाली भूकंप के झटके यांगून तक महसूस किए गए थे।
गौरतलब है कि 28 मार्च 2025 को मध्य म्यांमार में 7.7 और 6.4 तीव्रता के दो बड़े भूकंप आए थे। इन भूकंपों के बाद बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए थे। इस स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी थी कि भूकंप प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के सामने टीबी, एचआईवी, मच्छर और पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।
लगातार आ रहे भूकंप म्यांमार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि यहां भूकंपीय गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।
