ईरानी विदेश मंत्री अराघची की दो टूकः हम अमेरिका से नहीं डरते, मौत के खौफ से न बिकेगे और न झुकेंगे
punjabkesari.in Monday, Jul 20, 2026 - 12:21 PM (IST)
International Desk: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि ईरान को न धमकाया जा सकता है और न ही किसी लालच से झुकाया जा सकता है। उन्होंने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका को ईरान से "अलग तरीके" से बात करनी होगी। अराघची ने यह बयान ईरानी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव, परमाणु वार्ता और हालिया संघर्ष पर खुलकर अपनी बात रखी।
'जीरो यूरेनियम एनरिचमेंट' की मांग ठुकराई
अराघची ने दावा किया कि 12 दिन के युद्ध से पहले अमेरिका ने वार्ता के दौरान ईरान से शून्य यूरेनियम संवर्धन (Zero Uranium Enrichment) की मांग की थी।उन्होंने कहा कि ईरान ने इस मांग को "गैरकानूनी और अव्यावहारिक" बताते हुए खारिज कर दिया। उनके अनुसार, जब बातचीत से अमेरिका अपनी शर्तें नहीं मनवा सका तो उसने सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना।
विटकॉफ से बातचीत का किस्सा सुनाया
अराघची ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से कहा, "क्या आपने कभी ऐसी बैठक की है, जहां हर पल लगे कि किसी भी समय बम गिर सकता है? क्या आपने कभी अपने परिवार से इस सोच के साथ बात की है कि शायद यह आखिरी बातचीत हो? हमने यह सब झेला है और फिर भी डटे रहे।" उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व लगातार खतरे के बीच भी अपने रुख पर कायम रहा।
'धमकी और लालच दोनों बेअसर'
अराघची के मुताबिक, अमेरिका ने कुछ रियायतों के बदले ईरान में बिजली संयंत्र और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण का प्रस्ताव भी दिया था। उन्होंने कहा, "मैंने साफ कह दिया कि न कोई रिश्वत चलेगी और न कोई धमकी। धमकी उसी को दी जाती है जो डरता हो। हमने पहले ही तय कर लिया है कि इस रास्ते पर किसी भी पल मौत का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें डराया नहीं जा सकता।" अराघची ने अमेरिका की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान को वेनेजुएला समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, "यह वेनेजुएला नहीं है, जहां आप किसी एक व्यक्ति को पकड़ लें और बाकी लोग पीछे हट जाएं।"
