बाढ़ के बाद नेपाल में महंगाई ने तोड़ा रिकार्ड: जरूरी खाद्य सामान के दाम आसमान पर,गैस के लिए मारामारी

punjabkesari.in Wednesday, Sep 16, 2026 - 12:40 PM (IST)

Kathmandu: नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही के बाद अब आम लोगों पर महंगाई की मार पड़ रही है। सड़कों और पुलों के बह जाने से आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। नतीजा यह है कि जरूरी सामान के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। मटन 1700 रुपये किलो पहुंच गया है, जबकि एक अंडे के लिए लोगों को 25 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। रसोई गैस की किल्लत ने संकट और बढ़ा दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। इस आपदा में अब तक 1,388 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। बाढ़ में कई सड़कें और पुल बह जाने से बाजारों तक सामान पहुंचाना मुश्किल हो गया है।

 

द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, काठमांडू घाटी में पिछले कुछ हफ्तों में जरूरी खाद्य सामान के दाम तेजी से बढ़े हैं। जीरा मसिनो चावल के 20 किलो के बोरे की कीमत 500 रुपए बढ़कर 2,700 रुपए हो गई है। सूरजमुखी तेल 245 रुपए से बढ़कर 295-300 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरसों का तेल भी 410 रुपये से बढ़कर 460 रुपये लीटर हो गया है। चीनी की कीमत 100 रुपए से बढ़कर 140 रुपये किलो हो गई है, जबकि काली दाल 180 से बढ़कर 200 रुपये किलो बिक रही है। सब्जियों में टमाटर 120 रुपए किलो और करेला 100 रुपये किलो तक पहुंच गया है। फूजी सेब की कीमत भी 450 रुपए किलो तक बताई जा रही है।

 

मटन  और अंडे के भाव आसमान पर
महंगाई का सबसे बड़ा असर मांस और अंडे की कीमतों में दिखाई दे रहा है। मटन 1,300 रुपये से बढ़कर 1,700 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं एक अंडे की कीमत 22 रुपए से बढ़कर 25 रुपएहो गई है। बर्ड फ्लू और बाढ़ के कारण पैदा हुई आपूर्ति बाधाओं ने कीमतों पर और दबाव बढ़ाया है। यानी जिस अंडे को आम परिवारों के लिए सस्ता प्रोटीन माना जाता है, उसकी कीमत भी अब कई लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है।

 

रसोई गैस के लिए घंटों लाइन
नेपाल में सिर्फ खाने-पीने का सामान ही महंगा नहीं हुआ है। बाढ़ के बाद रसोई गैस की किल्लत ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। पृथ्वी राजमार्ग और भोटेकोशी इलाके में सड़क संपर्क टूटने के कारण काठमांडू तक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। कई जगह लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं हासिल कर पा रहे हैं।

 

त्योहारों का रंग भी फीका
नेपाल में सितंबर और अक्टूबर का समय तीज, दशैं और तिहार जैसे बड़े त्योहारों का होता है। लेकिन महंगाई ने इस बार त्योहारों की तैयारियों पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। ललितपुर की शांति बेलबासे ने बताया कि उन्होंने तीज पर अपनी तीन बहनों के लिए पारंपरिक सेलरोटी बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन चावल का आटा, चीनी, तेल और मसालों के बढ़े दाम देखकर उन्होंने पकवान बनाने का फैसला ही बदल दिया। उन्होंने बताया कि महंगाई और खाना पकाने की गैस की कमी के कारण इस बार उन्होंने तीज पर मेहमानों को भी नहीं बुलाया।

 

नेपाल राष्ट्र बैंक की चेतावनी
उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या केवल सामान की कमी नहीं है। उनका आरोप है कि आपदा और त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग का फायदा थोक व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा उठाया जा रहा है। इनके मुताबिक आपूर्ति बाधित होने के कारण परिवहन खर्च बढ़ा है, लेकिन कुछ जगहों पर इसी स्थिति का फायदा उठाकर कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ाई जा रही हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक नर बहादुर थापा ने चेतावनी दी है कि अगर महंगाई के कारण लोग खरीदारी कम करने लगे तो बाजार में मांग गिर सकती है। इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने और मंदी जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ से तबाह आपूर्ति तंत्र को बहाल करना अब नेपाल के लिए बड़ी चुनौती है। सड़कें और परिवहन व्यवस्था सामान्य नहीं हुईं तो महंगाई का दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।


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Content Writer

Tanuja

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