96% मुस्लिम आबादी वाले देश में हिजाब बैन; सरकार के ड्रेस कोड बदलाव पर भड़के छात्रा, तुर्किये तक पहुंची विरोध की आग(Video)
punjabkesari.in Wednesday, Oct 14, 2026 - 02:05 PM (IST)
Baku: मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर विवाद गहरा गया है। नए नियमों के तहत हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोके जाने की खबर है। इसके विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया है, जबकि पड़ोसी देश तुर्किये के इस्तांबुल में भी प्रदर्शन हुए हैं। सरकार का कहना है कि स्कूलों में समान ड्रेस कोड और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है, वहीं विरोध करने वाले इसे धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं।
🔴 Azerbaycan’da başörtülü bir öğrencinin feryadı: “Ben okumak istiyorum. Beni okula almıyorlar. Başımda örtüm var diye okumaya hakkım yok mu?” https://t.co/Q91VTzR62Y
— Mahfil (@mahfildijital) October 12, 2026
अजरबैजान सरकार ने स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए ड्रेस कोड के नियमों में बदलाव किया है। सरकार के अनुसार, सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान वेशभूषा व्यवस्था जरूरी है। रिपोर्टों के मुताबिक, नए नियमों में हिजाब पर सीधे प्रतिबंध लगाने के बजाय ऐसे कपड़ों पर रोक की बात कही गई है, जिन्हें निर्धारित ड्रेस कोड या धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना जाता। राष्ट्रीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े कुछ परिधान विशेष अवसरों पर स्कूल की संबंधित समिति की अनुमति से पहने जा सकते हैं। हालांकि, हिजाब पहनकर पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को स्कूल में प्रवेश या कक्षाओं में शामिल होने से रोके जाने की खबरों ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
Azerbaijan - Schoolgirl cries after being denied entry for wearing hijab. On September 21, Azerbaijan banned clothing that violates secularism in public schools. Girls wearing hijab are being sent home. Good. Keep going. Europe must do the same. https://t.co/EkUgQExLIa
— RadioGenoa (@RadioGenoa) October 12, 2026
धर्मनिरपेक्षता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता
अजरबैजान की लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम मानी जाती है। देश में शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम समुदाय भी मौजूद है। इसके बावजूद अजरबैजान का संविधान देश को धर्मनिरपेक्ष घोषित करता है और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मौजूदा विवाद इसी सवाल के इर्द-गिर्द है कि शैक्षणिक संस्थानों में समान ड्रेस कोड लागू करने और विद्यार्थियों की धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार समान नियमों पर जोर दे रही है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना निजी आस्था और व्यक्तिगत पसंद से जुड़ा विषय है।
Azerbaijan - Schoolgirl cries after being denied entry for wearing hijab. On September 21, Azerbaijan banned clothing that violates secularism in public schools. Girls wearing hijab are being sent home. Good. Keep going. Europe must do the same. https://t.co/EkUgQExLIa
— RadioGenoa (@RadioGenoa) October 12, 2026
छात्राओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार
स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार, कम से कम दो स्कूलों में विद्यार्थियों ने नए नियमों के विरोध में कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में कथित तौर पर हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं छात्राएं और शिक्षिकाएं भावुक दिखाई दे रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षिका जहरा हसानोवा ने अल जजीरा से कहा कि उन्हें हिजाब पहनकर स्कूल आने की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने हिजाब पहनने या न पहनने को व्यक्ति का निजी फैसला बताया। हालांकि, विरोध प्रदर्शनों के व्यापक स्तर और सभी स्कूलों में नियमों के वास्तविक क्रियान्वयन की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
जेल में बंद पत्रकार ने शुरू की भूख हड़ताल
अजरबैजान में जेल में बंद पत्रकार पोलाद असलानोव ने भी ड्रेस कोड विवाद के विरोध में भूख हड़ताल शुरू करने की बात कही है। रिपोर्ट के अनुसार, असलानोव को 2020 में देशद्रोह के मामले में दोषी ठहराया गया था। उनकी पत्नी गुलमिरा असलानोवा के फेसबुक खाते पर साझा संदेश में उन्होंने नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाने की बात कही। इस बीच, देश में इंटरनेट बंद किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन इंटरनेट पर निगरानी रखने वाले संगठनों की ओर से इसकी पुष्टि नहीं होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
इस्तांबुल में भी विरोध
अजरबैजान के ड्रेस कोड संबंधी फैसले के विरोध में तुर्किये के इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन होने की खबर है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार करने की मांग की। तुर्किये में कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसकी तुलना 1997 के उस दौर से की, जब वहां विश्वविद्यालयों में हिजाब पहनने वाली महिलाओं पर पाबंदियां लगाई गई थीं। अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने अपनी पार्टी की बैठक में कहा कि किसी को भी उनके देश की जीवनशैली में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्हों
