पाकिस्तान को तगड़ा झटका, मुस्लिम देश ने बंद कर दी ये बड़ी सुविधा, भारत को राहत
punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 02:40 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: पश्चिम एशियाई देश कतर ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लेते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए 'वीजा ऑन अराइवल' (पहुंचने पर वीजा) की सुविधा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जहां एक ओर पाकिस्तान इस समय कड़े यात्रा प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत और कतर के प्रगाढ़ होते रिश्तों का असर स्पष्ट दिख रहा है। युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद, कतर ने भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियमों को उदार बनाए रखा है।
पाकिस्तानियों के लिए अनिवार्य हुआ पहले से वीजा लेना
कतर में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने मंगलवार को एक आधिकारिक यात्रा परामर्श (Travel Advisory) जारी करते हुए इस बदलाव की पुष्टि की है। दूतावास ने स्पष्ट किया है कि अब बिना पहले से प्राप्त वीजा के कतर पहुंचने वाले पाकिस्तानी यात्रियों को हवाई अड्डे से ही वापस भेजा जा सकता है। दूतावास ने इस फैसले के पीछे 'मौजूदा क्षेत्रीय हालात' और कतर की आंतरिक सुरक्षा स्थितियों को मुख्य कारण बताया है। यात्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से जानकारी जुटाएं और कतरी वीजा केंद्रों से संपर्क करें।
भारतीयों के लिए जारी है 'रेड कारपेट' स्वागत
एक तरफ जहां पाकिस्तान के लिए नियम सख्त हुए हैं, वहीं भारत के साथ कतर के संबंध और भी मजबूत नजर आ रहे हैं। 28 फरवरी 2026 से कतर सरकार ने उन सभी प्रवेश वीजा की अवधि को स्वतः ही 30 दिनों के लिए बढ़ा दिया था, जो खत्म होने की कगार पर थे। यह विशेष राहत उन भारतीयों को दी गई थी जो पहले से वहां मौजूद थे।
भारतीयों के लिए वर्तमान शर्तें:
कतर आज भी भारतीय पासपोर्ट धारकों को 30 दिनों का मुफ्त वीजा (Visa-Free Entry) दे रहा है। इसके लिए नियम पहले की तरह ही सरल हैं:
पासपोर्ट वैधता: पासपोर्ट कम से कम 6 महीने के लिए मान्य होना चाहिए।
यात्रा टिकट: वापसी या आगे की यात्रा का कंफर्म टिकट होना अनिवार्य है।
स्वास्थ्य बीमा: यात्रियों के पास अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा होना चाहिए।
होटल बुकिंग: रहने के लिए वैध होटल बुकिंग की पुष्टि आवश्यक है।
कूटनीतिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल दोनों देशों के बीच के सुरक्षा संबंधों को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की गिरती साख और भारत के बढ़ते प्रभाव का भी प्रतीक है। युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के समय में भी भारतीयों के लिए इन सुविधाओं का निर्बाध जारी रहना नई दिल्ली और दोहा के बीच अटूट भरोसे को रेखांकित करता है।
