फ्लोरिडा विमान हादसाः 35 हजार फीट ऊंचाई पर हुआ मौत का तांडव, वीडियो में देखें बादल ने कैसे जेट को ऊपर खींचा फिर जमीन पर पटका

punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 11:38 AM (IST)

Florida: अमेरिका के फ्लोरिडा में एक छोटे जेट विमान के हादसे की संभावित वजह सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वेस्ट पाम बीच के पास लियरजेट 60 विमान तेजी से विकसित हो रहे तूफानी बादल की चपेट में आ गया था। उस समय आसमान में हवा के तेज झटके चल रहे थे और विमान पर बर्फ जमने की स्थिति बन रही थी। पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए पहले रास्ता बदलने और फिर उड़ान की ऊंचाई बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ गए। महज कुछ ही देर में पायलटों को आपातकालीन संदेश यानी मेडे कॉल देना पड़ा। शुरुआती मौसम और उड़ान संबंधी आंकड़े तूफान, हवा के झटकों और बर्फ जमने को हादसे की संभावित वजह बता रहे हैं।

 

हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) की जांच पूरी होने के बाद ही होगा।  हादसे के समय विमान वेस्ट पाम बीच से करीब 13 किलोमीटर पश्चिम में रॉयल पाम बीच, लोक्साहाची ग्रोव्स और वेस्टलेक इलाके के ऊपर से गुजर रहा था। इसी दौरान वहां एक शक्तिशाली तूफानी बादल तेजी से विकसित हो रहा था। मौसम के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहर 12:36 बजे यह बादल करीब 33 हजार फीट की ऊंचाई पर था। महज 20 मिनट बाद यानी 12:56 बजे इसकी ऊंचाई बढ़कर 48 हजार 300 फीट हो गई। यानी बादल ने केवल 20 मिनट में करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई हासिल कर ली।  मौसम विज्ञान की भाषा में इस तरह तेजी से ऊपर उठने वाले बादल के भीतर बेहद शक्तिशाली ऊर्ध्वाधर हवाएं चल सकती हैं। इन हवाओं के कारण विमान को अचानक ऊपर-नीचे धकेलने वाले तेज झटके लग सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में विमान को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

 

उड़ान के दौरान पायलटों को खराब मौसम का अंदाजा हो गया था। दोपहर 12:37 बजे कैप्टन ने वायु यातायात नियंत्रण केंद्र को बताया कि आगे खराब मौसम से बचने के लिए विमान को थोड़ा बाईं तरफ मोड़ना पड़ सकता है। नियंत्रण केंद्र ने इसकी अनुमति दे दी थी। उस समय विमान तूफानी बादल से करीब 128 किलोमीटर दूर था। लेकिन मौसम तेजी से बदल रहा था। दोपहर 12:47 बजे दूसरे पायलट ने विमान पर हल्की पारदर्शी बर्फ जमने और हवा के मध्यम झटके लगने की जानकारी दी। इससे संकेत मिलता है कि विमान खराब मौसम के प्रभाव में आना शुरू हो चुका था। इस हादसे में विमान पर बर्फ जमने की स्थिति को भी अहम माना जा रहा है। विमान जिस ऊंचाई पर उड़ रहा था, वहां बाहर का तापमान करीब शून्य से 45 डिग्री फारेनहाइट नीचे यानी लगभग 7.2 डिग्री सेल्सियस ऋणात्मक था। दोपहर 12:48 बजे दूसरे पायलट ने बारिश बढ़ने की जानकारी देते हुए विमान की ऊंचाई बढ़ाने की बात कही। पायलट करीब 35 हजार फीट से 37 हजार फीट तक जाना चाहते थे।

 

लेकिन इस बातचीत के लगभग 20 सेकंड बाद ही विमान से आपातकालीन संदेश यानी मेडे कॉल जारी किया गया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विमान के सामने स्थिति कितनी तेजी से बिगड़ी होगी।  हादसे से जुड़े कुछ वीडियो और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में विमान के पिछले हिस्से यानी हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि दुर्घटना से पहले विमान का यह हिस्सा गायब दिखाई दे रहा था। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विमान के इस हिस्से को नुकसान हवा में लगा था या जमीन से टकराने के दौरान। अमेरिका का राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड (एनटीएसबी) इस दुर्घटना की विस्तृत जांच करेगा। जांच में मौसम संबंधी आंकड़ों, विमान के उड़ान रिकॉर्ड, पायलटों के बीच हुई बातचीत और मलबे की तकनीकी स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा।


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Content Writer

Tanuja

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