ईरान का नया दावः अब रूस-ओमान के साथ मिलकर बनाई रणनीति, युद्ध और शांति पर बड़ा फैसला संभव
punjabkesari.in Monday, Apr 27, 2026 - 11:28 AM (IST)
International Desk: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान अपनी कूटनीतिक रणनीति को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया। इन दौरों का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के साथ संभावित बातचीत को फिर से शुरू करने की शर्तों पर सहमति बनाना है। ईरान अब सीधे बातचीत से पहले अपने सहयोगी देशों के साथ स्थिति स्पष्ट करना चाहता है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बैठकों को ईरान ने “बहुत उपयोगी” बताया। इन बैठकों में अमेरिका-ईरान बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए जरूरी शर्तों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक महत्वपूर्ण संदेश भी भेजा, जिसमें उसकी “रेड लाइन्स” यानी स्पष्ट शर्तें बताई गईं।
इन शर्तों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, अमेरिकी प्रतिबंध हटाने की मांग, भविष्य में हमले न करने की गारंटी और नुकसान की भरपाई शामिल हैं। पाकिस्तान यहां एक संभावित मध्यस्थ की भूमिका में नजर आ रहा है। इसके बाद ओमान में हुई बातचीत का केंद्र होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) रहा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। ईरान और ओमान दोनों इस जलमार्ग के तटीय देश हैं, इसलिए इसकी सुरक्षा उनके लिए बेहद जरूरी है। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और वहां से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना होगा। इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर की बातचीत जारी रखने का भी फैसला लिया गया।
इन क्षेत्रीय बैठकों के बाद अब ईरानी विदेश मंत्री सेंट पीटर्सबर्ग St Petersburg पहुंचे हैं, जहां उनकी मुलाकात व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से होने वाली है। इस मुलाकात में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, संभावित युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा की जाएगी। ईरान और रूस पहले से ही कई मुद्दों पर एक-दूसरे के करीबी सहयोगी रहे हैं, खासकर जब बात अमेरिका के दबाव का सामना करने की होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भी दिया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि पहले हॉर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित और खुला बनाया जाए, युद्ध को समाप्त किया जाए और उसके बाद ही आगे की बातचीत की जाए।
ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह फिलहाल परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टालना चाहता है और पहले क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है। कुल मिलाकर, ईरान इस समय “शटल डिप्लोमेसी” यानी अलग-अलग देशों के साथ लगातार बातचीत करके अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ तालमेल बनाकर ईरान अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से पहले अपनी शर्तें तय कर रहा है, ताकि उसे कूटनीतिक रूप से मजबूत स्थिति मिल सके।
