भारत के राजनयिक ने RCMP पर उठाए सवाल, कहा- जांच सिर्फ कल्पना पर आधारित

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 10:01 PM (IST)

ओटावा/नई दिल्ली: भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बीच भारत के शीर्ष राजनयिक ने कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों पर अब तक का सबसे बड़ा और तीखा हमला बोला है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कनाडाई खुफिया एजेंसी (CSIS) और पुलिस (RCMP) की जांच को पूरी तरह "फंतासी" (Fantasy) करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां राजनीतिक रूप से समझौता कर चुकी हैं और खालिस्तानी अलगाववादियों के इशारों पर काम कर रही हैं।

खालिस्तानियों ने खरीदी कनाडाई एजेंसियां!
एक विशेष साक्षात्कार में उच्चायुक्त पटनायक ने सनसनीखेज दावा किया कि कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) को उन सिख अलगाववादियों ने 'कॉम्प्रोमाइज' कर लिया है, जो कनाडा को भारत के खिलाफ आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक सुझाव दिया कि खालिस्तानी समूहों ने कनाडाई खुफिया अधिकारियों को भारत के खिलाफ झूठे दावे करने के लिए पैसे दिए हैं। उनके अनुसार, हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच को जानबूझकर "मरोड़ा" गया और इसका राजनीतिकरण किया गया है।

'कमजोर' प्रधानमंत्री और अलगाववादियों की जुगलबंदी
पटनायक ने पूर्व ट्रूडो सरकार पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि खालिस्तानी अलगाववादियों को कनाडा में इसलिए सफलता मिली क्योंकि वहां का प्रधानमंत्री इतना 'कमजोर' था कि उसने उनके एजेंडे को अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओटावा उन चरमपंथी तत्वों को "संरक्षण" दे रहा है जो भारत में हिंसा से जुड़े हैं। पटनायक के अनुसार, कनाडा ने 2024 में पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को निष्कासित कर सभी मर्यादाएं लांघ दी थीं।

'पब्लिक ट्रायल' बंद करे कनाडा, कोर्ट में सबूत दिखाए
भारतीय उच्चायुक्त ने कनाडा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास भारत के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत है, तो उसे सार्वजनिक मंच पर तमाशा बनाने के बजाय अदालत में पेश करें। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या दुनिया भर में जांच एजेंसियां इसी तरह काम करती हैं? आप एक विकसित देश हैं, कानून-व्यवस्था के अनुसार काम कीजिए"। उन्होंने साफ किया कि भारत ने अपनी डिप्लोमैटिक मिशन का इस्तेमाल कभी किसी अवैध गतिविधि के लिए नहीं किया है।

'रॉग एजेंट' की संभावना, पर सरकार का हाथ नहीं
पटनायक ने स्वीकार किया कि यह संभव है कि भारत सरकार के निर्देश के बाहर कुछ 'रॉग एजेंट' (Rogue Agents) या "सिरफिरे तत्व" काम कर रहे हों, लेकिन इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा साबित होता है, तो भारत स्वयं उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। उन्होंने विकास यादव के मामले का उदाहरण दिया, जिसे भारत ने एक अपहरण मामले में गिरफ्तार किया था, लेकिन अब वह लापता है।

कनाडा ने दावों को किया खारिज
दूसरी ओर, कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसंगरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि CSIS पर समझौता करने का सुझाव पूरी तरह गलत है और यह देश की सुरक्षा में लगे पुरुषों और महिलाओं के काम को कमजोर करता है। हालांकि, कनाडाई एजेंसी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में अब भी भारत पर निगरानी और डराने-धमकाने के हथकंडे अपनाने का आरोप लगा रही है।


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Content Writer

Pardeep

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