सिक्स पैक नहीं, इस अनोखी जगह पर बड़े पेट वाले मर्दों को दिल दे बैठतीं हैं लड़कियां, जानें कारण?
punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 11:53 AM (IST)
Fat Men Attractive Culture : दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में लोग जिम जाकर पसीना बहाते हैं ताकि वे फिट और स्लिम दिख सकें लेकिन अफ्रीका के इथियोपिया में एक ऐसी जगह है जहां सुंदरता की परिभाषा पूरी तरह उलट है। यहां की 'बोडी जनजाति' में उस मर्द को सबसे आकर्षक और हैंडसम माना जाता है जिसका पेट सबसे ज्यादा बाहर निकला हो। यहां तोंद सिर्फ मोटापा नहीं बल्कि अमीरी, ताकत और सम्मान की निशानी है।
सबसे मोटे मर्द को चुनने की जंग
इस जनजाति में हर साल का एल नाम का एक अनोखा त्यौहार मनाया जाता है। यह एक ऐसी प्रतियोगिता है जिसमें गांव का हर परिवार अपने एक अविवाहित युवक को हिस्सा लेने के लिए भेजता है। प्रतियोगिता का मकसद होता है—6 महीने के अंदर खुद को सबसे ज्यादा मोटा बनाना।

युवक 6 महीने तक झोपड़ी से नहीं निकलते बाहर
इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले युवक किसी तपस्वी की तरह 6 महीने गुजारते हैं। ये युवक 6 महीने तक अपनी झोपड़ी से बाहर नहीं निकलते और किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत नहीं करते। वजन बढ़ाने के लिए ये युवक केवल दूध और गाय के खून का मिश्रण पीते हैं। सुबह-सुबह इस भारी मात्रा में लिक्विड डाइट को पीना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। खास बात यह है कि गाय को मारा नहीं जाता। उससे थोड़ा खून निकालकर घाव को मिट्टी से भर दिया जाता है। बोडी समुदाय में गायों को बहुत पवित्र माना जाता है।

फिर 6 महीने पूरे होने के बाद ये युवक अपने शरीर पर राख और मिट्टी लगाकर गांव के सामने आते हैं। पूरे समुदाय के सामने उनकी तोंद नापी जाती है। जो युवक सबसे ज्यादा मोटा और भारी होता है उसे विजेता घोषित किया जाता है। विजेता को कोई नकद इनाम नहीं मिलता लेकिन वह पूरे जीवन के लिए समाज का हीरो बन जाता है।
महिलाओं के बीच जबरदस्त डिमांड
जहां दुनिया भर में 'सिक्स पैक एब्स' का क्रेज है वहीं बोडी जनजाति की लड़कियां भारी शरीर और बड़े पेट वाले पुरुषों को अपना जीवनसाथी बनाना पसंद करती हैं। उनके लिए बड़ा पेट इस बात का सबूत है कि पुरुष समृद्ध है और अपने परिवार का पेट पालने में सक्षम है।

खतरे में है ये पुरानी परंपरा
बदलते वक्त और आधुनिक जीवनशैली के कारण अब यह परंपरा धीरे-धीरे कम हो रही है। शिक्षा और बाहरी दुनिया के संपर्क की वजह से नई पीढ़ी अब इस कठिन और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी प्रक्रिया से दूर हो रही है। बावजूद इसके यह परंपरा आज भी दुनिया को यह संदेश देती है कि सुंदरता केवल देखने वाले के नजरिए और संस्कृति पर निर्भर करती है।
