खाड़ी में महायुद्ध की आहट! दुबई में ड्रोन हमला, 100 डॉलर के पार पहुंचा तेल, जानें क्या घुटने टेकने वाला है ईरान?

punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 12:00 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्क: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 13वें दिन खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार तड़के दुबई के आलीशान क्रीक हार्बर के पास एक संदिग्ध ड्रोन गिरने से हड़कंप मच गया। हालांकि, यूएई (UAE) के अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके को खाली कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस घटना में किसी के आहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इसने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

मिसाइलों की बारिश और हाई अलर्ट पर खाड़ी देश
बीती रात खाड़ी के आसमान में मिसाइलों और ड्रोनों का तांडव देखने को मिला। अमेरिका और उसके सहयोगियों की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) ने बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और यूएई की ओर आ रही ईरानी मिसाइलों को बीच हवा में ही नष्ट कर दिया। बढ़ते हमलों को देखते हुए इराक ने अपने प्रमुख तेल बंदरगाह पर परिचालन रोक दिया है। दो तेल टैंकरों पर हुए घातक हमलों ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

ईरान की खुली धमकी- 'बंदरगाहों को बनाएंगे निशाना'
तेहरान ने जलते हुए इस विवाद में घी डालने का काम किया है। ईरानी सशस्त्र बलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके बंदरगाहों पर हमला हुआ, तो वे पूरे क्षेत्र के वाणिज्यिक बंदरगाहों को निशाना बनाएंगे।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शांति के लिए 3 शर्तें रखी हैं:-
- ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए।
- युद्ध से हुए नुकसान का हर्जाना दिया जाए।
- भविष्य में हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले।

ट्रम्प का दावा- 'हार के कगार पर है ईरान'
इस भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि ऑपरेशन अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने दावा किया कि ईरान लगभग हार चुका है और यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि तेहरान पीछे नहीं हटा, तो उसके बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। पेंटागन के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस ऑपरेशन में अब तक 7 अमेरिकी सैनिक शहीद हुए हैं और 140 घायल हुए हैं।

दुनिया भर में तेल का संकट: कीमतें $100 के पार
युद्ध का सबसे बुरा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चा तेल (Brent Crude) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने संकट से निपटने के लिए अपने रणनीतिक भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है, लेकिन फिलहाल कीमतों में गिरावट के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।


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Content Editor

Anil Kapoor

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