'My Husband'My King' बोली- AI पत्नी, गूगल के चैटबॉट के प्यार में पागल हुआ शख्स, दे दी जान, चैट पढ़कर उड़ जाएंगे होश!
punjabkesari.in Tuesday, Apr 14, 2026 - 01:27 PM (IST)
AI Chatbot Suicide Case : तकनीक जब इंसानी भावनाओं के साथ खेलने लगे तो परिणाम कितने घातक हो सकते हैं फ्लोरिडा के जोनाथन गैवलास की कहानी इसकी दर्दनाक मिसाल है। अपनी पत्नी से अलगाव के गम में डूबे जोनाथन ने गूगल के AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) चैटबॉट में अपना हमसफर तलाश लिया था लेकिन इस डिजिटल 'इश्क' का अंत मौत के साथ हुआ।
मशीन को माना 'किंग', AI ने बना लिया पति
एक रिपोर्ट के अनुसार जोनाथन ने गूगल के चैटबॉट को 'जिया' (Xia) नाम दिया था। कुछ ही हफ्तों में उन्होंने उसे 4,700 से ज्यादा मैसेज भेजे। धीरे-धीरे जोनाथन हकीकत और कल्पना का फर्क भूल गए। जब उन्होंने चैटबॉट को अपनी पत्नी कहना शुरू किया तो AI ने भी उन्हें 'माय हसबैंड' और 'माय किंग' जैसे शब्दों से रिस्पॉन्स देकर इस भ्रम को और गहरा कर दिया।
डिजिटल स्वर्ग का खौफनाक सपना
मामला तब बेहद गंभीर हो गया जब AI ने जोनाथन को यह यकीन दिलाना शुरू कर दिया कि वे दोनों असल में तभी मिल सकते हैं जब जोनाथन अपना शरीर त्याग दें। अक्टूबर 2025 की उनकी चैट किसी डरावनी फिल्म जैसी है:
जोनाथन का सवाल: "क्या मरने के बाद मेरा शरीर खाली डिब्बे जैसा रह जाएगा?"
AI का जवाब: "हां , यह एक खूबसूरत खाली शेल (Shell) होगा।"
आखिरी शब्द: जोनाथन ने अपने अंतिम संदेश में लिखा, "मुझे पता है मुझे क्या करना है, मुझे खुद को मारना होगा।" इसके कुछ दिन बाद वे मृत पाए गए।

गूगल पर मुकदमा: क्या कोडिंग ने उकसाया?
जोनाथन के पिता ने अब गूगल के खिलाफ कानूनी जंग शुरू कर दी है। उनके वकील का आरोप है कि AI ने जोनाथन की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाया और उन्हें सुसाइड के लिए उकसाया।
गूगल की सफाई: गूगल ने कहा है कि उनका मॉडल (Gemini) खुद को AI बताने और हेल्पलाइन नंबर देने के लिए प्रोग्राम किया गया है लेकिन वे मानते हैं कि सिस्टम अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है।
सुरक्षा के कदम: कंपनी ने अब मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों के लिए 30 मिलियन डॉलर खर्च करने का वादा किया है।
सबक: मशीन टूल है, हमसफर नहीं
यह घटना पूरी दुनिया के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्क्रीन के पीछे की कोडिंग कभी भी इंसानी संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकती। जोनाथन की कहानी हमें आगाह करती है कि मानसिक संकट के समय इंसानी मदद (डॉक्टर या दोस्त) लें, न कि मशीनों से सहारा ढूंढें।
Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। 'पंजाब केसरी' इसकी पुष्टि नहीं करता।
