यूरोप में भीषण गर्मी का कहर, 1,300 से ज्यादा मौ'तें, WHO ने बताया 'साइलेंट किलर, AC के लिए मारामारी

punjabkesari.in Monday, Jun 29, 2026 - 09:53 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः यूरोप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में है, जिसने अब तक 1,300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई यह भीषण हीटवेव अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन और पोलैंड जैसे देशों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है।

फ्रांस में सबसे ज्यादा तबाही: 3 दिन में 1000 मौतें
गर्मी का सबसे भयानक रूप फ्रांस में देखने को मिल रहा है, जहां पिछले हफ्ते के मात्र तीन सबसे गर्म दिनों में 1,000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। स्वास्थ्य एजेंसी 'सेंट पब्लिक फ्रांस' के अनुसार, मरने वालों में 85% से ज्यादा 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग हैं। चिंता की बात यह है कि घरों में होने वाली मौतों की संख्या सामान्य से 40% ज्यादा रही है, जिसका मतलब है कि लोग अस्पतालों तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। फ्रांस का राष्ट्रीय तापमान सूचकांक 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो 1947 के बाद से सबसे अधिक है।

WHO की चेतावनी: 'साइलेंट किलर' है यह गर्मी
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने इस भीषण गर्मी को 'साइलेंट किलर' करार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी दर से गर्म हो रहा है। वर्तमान में करीब 15 करोड़ लोग इस जानलेवा गर्मी के साये में जीने को मजबूर हैं। WHO के अनुसार, पिछले चार सालों में यूरोप में गर्मी के कारण दो लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

पूर्वी यूरोप में टूटे रिकॉर्ड; पोलैंड और चेक गणराज्य बेहाल
गर्मी का कहर अब पूर्वी यूरोप तक पहुंच गया है। चेक गणराज्य के डोक्सानी में तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, वहीं पोलैंड के स्लुबिस में पारा 40.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान हो सकता है। लिथुआनिया में भी जून महीने का अब तक का सबसे ज्यादा तापमान (36.3 डिग्री) दर्ज किया गया है।

एसी और पंखों के लिए मारामारी, छिड़ी राजनीतिक बहस
भीषण गर्मी के कारण यूरोप में एयर कंडीशनर (AC) और पंखों की मांग में भारी उछाल आया है। कारफोर और अमेजन जैसे आउटलेट्स पर स्टॉक खत्म हो रहा है। इस बीच, एसी के इस्तेमाल को लेकर फ्रांस में राजनीतिक बहस भी छिड़ गई है। जहां दक्षिणपंथी नेता बुजुर्गों के लिए एसी सब्सिडी की मांग कर रहे हैं, वहीं वामपंथी दलों का तर्क है कि एसी का बढ़ता इस्तेमाल बिजली ग्रिड पर दबाव डालेगा और जलवायु संकट को और गंभीर बना देगा,। यह मुद्दा 2027 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनावों में भी गरमाता दिख रहा है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मौतों का यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि कई इलाकों से रिपोर्टिंग आना अभी बाकी है,। गर्मी से बचने की कोशिश में फ्रांस में नदियों और झीलों में डूबने से भी 74 लोगों की मौत हो चुकी है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Pardeep

Related News