ग्रीनलैंड पर ट्रंप के बयान से भड़का यूरोप, अमेरिका को सुनाई खरी-खरी
punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 06:47 PM (IST)
Washington: ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी पर यूरोप के कई बड़े देशों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन के नेताओं ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है।यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट कहा कि रणनीतिक और खनिज संसाधनों से भरपूर आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और उस पर किसी बाहरी देश का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वशासित क्षेत्र है।
यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड को अपने सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बनाना जरूरी है। मिलर ने एक इंटरव्यू में कहा, “राष्ट्रपति महीनों से स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपनी समग्र सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहिए।” इससे पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी थी कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा नाटो सैन्य गठबंधन के अंत जैसा होगा। उन्होंने ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ मिलकर ट्रंप के इस विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की है, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर अमेरिकी आक्रामक रुख को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। यूरोपीय देशों का मानना है कि ग्रीनलैंड पर इस तरह के बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं, बल्कि यूरोप-अमेरिका संबंधों और नाटो की एकता के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। विश्लेषकों के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र में संसाधनों और सामरिक महत्व को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।
