कोलंबिया चुनाव में ट्रंप समर्थक उम्मीदवार को बढ़त, सत्ता पक्ष ने परिणामों पर उठाए सवाल
punjabkesari.in Monday, Jun 01, 2026 - 02:01 PM (IST)
International Desk: दक्षिण अमेरिकी देश Colombia में राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजों ने सियासी मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है। अपराध के खिलाफ सख्त रुख और दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जाने जाने वाले Abelardo de la Espriella ने पहले दौर में बढ़त हासिल की है। हालांकि किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए चुनाव अब दूसरे दौर में जाएगा। जून में होने वाले रनऑफ चुनाव में दे ला एस्प्रीएला का मुकाबला सत्तारूढ़ गठबंधन हिस्टोरिक पैक्ट के उम्मीदवार Ivan Cepeda से होगा।
किसे कितने वोट मिले?
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार 99.98 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी होने तक एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को 44% तथा इवान सेपेडाको 41% वोट मिले ।यह नतीजा कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला रहा, क्योंकि मतदान से पहले अधिकांश जनमत सर्वेक्षणों में सेपेदा को बढ़त दिखाई जा रही थी।
सत्तारूढ़ दल ने नतीजों पर उठाए सवाल
सेपेदा और उनके सहयोगी, वर्तमान राष्ट्रपति Gustavo Petro ने चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि लाखों वोटों में गड़बड़ी हुई हो सकती है और विदेशी तत्वों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया है। हालांकि, अब तक इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है।
सेपेदा ने कहा कि वे अंतिम रूप से परिणाम स्वीकार करने से पहले चुनाव आयोग की जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे।
'द टाइगर' की बढ़ती लोकप्रियता
दे ला एस्प्रीएला को उनके समर्थक "एल टिग्रे" (The Tiger) के नाम से जानते हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान अपराधी गिरोहों और सशस्त्र समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने खुद को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों का समर्थक बताते हुए कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और कठोर प्रशासन को अपनी प्राथमिकता बनाया।
जहां सेपेदा ने देश में सक्रिय गुरिल्ला संगठनों और आपराधिक गिरोहों के साथ बातचीत कर "पूर्ण शांति" स्थापित करने की नीति का समर्थन किया है, वहीं दे ला एस्प्रीएला का कहना है कि हिंसक समूहों के खिलाफ सैन्य और कानूनी कार्रवाई ही देश में स्थिरता ला सकती है। इस वजह से दूसरा दौर केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि कोलंबिया की भविष्य की दिशा तय करने वाली वैचारिक लड़ाई भी माना जा रहा है।
