चीन जाकर फंसे अराघची ! अमेरिका टकराव पर वांग यी ने की दो टूक बात, कहा-"तत्काल करो युद्धविराम"
punjabkesari.in Wednesday, May 06, 2026 - 03:03 PM (IST)
International Desk: चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) और ईरान के विदेश मंत्री सयद अब्बास अराघची (Sayed Abbas Araghchi) के बीच बीजिंग में हुई अहम बैठक ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट को लेकर वैश्विक चिंता को और स्पष्ट कर दिया है। इस बैठक में चीन ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा हालात “अत्यंत चिंताजनक” हैं और तत्काल एक व्यापक युद्धविराम लागू करना जरूरी है। वांग यी ने जोर देकर कहा कि संघर्ष का दोबारा भड़कना स्वीकार्य नहीं है और सभी पक्षों को संवाद और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। चीन का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ईरान का प्रमुख आर्थिक साझेदार और कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
🇨🇳🇮🇷 China's FM called U.S. and Israel's military campaign against Iran "illegitimate" during talks with his Iranian counterpart in Beijing, saying the Middle East is at a "decisive turning point" and a full ceasefire is essential.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) May 6, 2026
Iran's FM Araghchi thanked Beijing for its… https://t.co/xyokbxmoMr pic.twitter.com/XwdVjP8SCF
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने तक चले संघर्ष के बाद भी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद यह ईरान के विदेश मंत्री की पहली चीन यात्रा है, जो इस बात का संकेत है कि तेहरान अब वैश्विक समर्थन और रणनीतिक संतुलन बनाने में जुटा है। बैठक में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा सबसे अहम रहा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की 20 प्रतिशत से अधिक तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। अमेरिका द्वारा ईरान पर दबाव डालने और समुद्री गतिविधियों को लेकर बढ़ते तनाव ने इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
इस बीच, अमेरिका की ओर से मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसकी कार्रवाइयों के कारण वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है। उन्होंने चीन से भी अपील की कि वह ईरान को समझाए कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना या बाधित करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। रुबियो ने यह भी कहा कि चीन खुद इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर तेल आयात और निर्यात पर निर्भर है। इसलिए चीन के हित में भी यही है कि वह ईरान को इस रास्ते को खुला रखने के लिए प्रेरित करे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की 14-15 मई को प्रस्तावित चीन यात्रा भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस यात्रा के दौरान व्यापार समझौते के साथ-साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। चीन ने एक ओर जहां शांति और बातचीत पर जोर दिया है, वहीं उसने अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी की आलोचना भी की है। दूसरी ओर, खबरें यह भी हैं कि चीन क्षेत्रीय देशों, खासकर पाकिस्तान के साथ मिलकर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
