डिफेंस टेक्नोलॉजी में चीन का नया कमाल: दुनिया का सबसे बड़ा "कार्गो ड्रोन" किया तैयार, खासियत कर देगी हैरान ! (Video)
punjabkesari.in Saturday, Apr 04, 2026 - 03:32 PM (IST)
Bejing: चीन (China) ने ड्रोन टेक्नोलॉजी में एक बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे बड़े मानव रहित मालवाहक ड्रोन ‘Changying-8’ का सफल परीक्षण किया है। इस ड्रोन को “उड़ने वाला ट्रक” कहा जा रहा है क्योंकि यह 3.5 मीट्रिक टन तक का भारी सामान ले जाने में सक्षम है। यह ड्रोन हेनान प्रांत के झेंग्झौ शांगकियाओ एयरपोर्ट से उड़ान भरकर करीब 30 मिनट तक हवा में रहा और सफलतापूर्वक लैंड किया। इस दौरान इसके सभी सिस्टम जैसे उड़ान नियंत्रण, इंजन, बिजली और मैकेनिकल सिस्टम की जांच की गई।
🚨⚡️ China reshapes air cargo!!
— RussiaNews 🇷🇺 (@mog_russEN) April 3, 2026
🇨🇳 First flight of Changying-8 cargo drone
- 30 min flight
- 17m length
- 25m wingspan
- 7t MTOW
- 3.5t payload
- 3000+ km range pic.twitter.com/AIRKyHgk5Q
कार्गो ड्रोन की खासियतें
- इस ड्रोन को Norinco ने तैयार किया है।
- इसकी लंबाई 17 मीटर और पंखों का फैलाव 25 मीटर है।
- यह एक बार में लगभग 3,000 किलोमीटर तक उड़ सकता है, जो इसे लंबी दूरी के लिए बेहद उपयोगी बनाता है।
- ‘चांगयिंग-8’ को उड़ान भरने और उतरने के लिए सिर्फ 500 मीटर से भी कम जगह चाहिए।
- यानी यह कच्चे रनवे, पहाड़ी इलाकों और द्वीपों पर भी आसानी से काम कर सकता है।
- इसमें आगे और पीछे लोडिंग दरवाजे दिए गए हैं, जिससे करीब 15 मिनट में भारी माल लादा जा सकता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि इस ड्रोन के आने से चीन की सैन्य और लॉजिस्टिक क्षमता और मजबूत होगी।
- साथ ही, भविष्य में इससे भी बड़े और एडवांस ड्रोन विकसित करने की दिशा में चीन तेजी से आगे बढ़ सकता है।
चीन का मकसद
सबसे बड़ा कारण तेजी से और भारी माल की सप्लाई है। इससे सेना और आपातकालीन सेवाओं को दूर-दराज इलाकों में जल्दी सामान पहुंचाने में मदद मिलेगी जहां ट्रक या विमान आसानी से नहीं पहुंच पाते। युद्ध या तनाव के समय यह ड्रोन हथियार, रसद (logistics), और जरूरी उपकरण बिना पायलट के जोखिम के पहुंचा सकता है। इससे सैनिकों की जान का खतरा कम होता है और ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित बनते हैं। इसा आर्थिक और लॉजिस्टिक फायदा है। बड़े ड्रोन के जरिए कंपनियां और सरकारें कम खर्च में तेज डिलीवरी कर सकती हैं, खासकर लंबी दूरी पर। यह चीन की तकनीकी ताकत दिखाने और ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे रहने की रणनीति का हिस्सा भी है।
