ईरान जंग ने हिला दी चीन की रणनीतिः मिडिल ईस्ट में कमजोर पड़ रहा प्रभाव, खतरे में तेल सप्लाई
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 02:55 PM (IST)
International Desk:मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है। खास तौर पर China की रणनीति इस युद्ध से सीधे प्रभावित होती नजर आ रही है। चीन ने पिछले कुछ सालों में मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अलग रास्ता अपनाया था। जहां अमेरिका सैन्य ताकत और गठबंधनों के जरिए प्रभाव बनाता रहा, वहीं चीन ने निवेश, व्यापार और कूटनीति के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया। चीन के लिए इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अहमियत उसकी ऊर्जा जरूरतें हैं।
वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसे Iran, Saudi Arabia और Iraq जैसे देशों से बड़ी मात्रा में तेल मिलता है। इसलिए मिडिल ईस्ट में स्थिरता चीन के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा, चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative (BRI) में भी मिडिल ईस्ट की अहम भूमिका है। इस योजना के तहत चीन एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार नेटवर्क बना रहा है, जिसमें ईरान एक महत्वपूर्ण कड़ी है। लेकिन मौजूदा युद्ध ने इस पूरी रणनीति को झटका दिया है। Strait of Hormuz में तनाव बढ़ने से तेल सप्लाई और व्यापार दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
यह वही रास्ता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है और चीन की निर्भरता भी इसी पर है। चीन ने इस पूरे संघर्ष में अब तक सीधा सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया है और सिर्फ शांति की अपील की है। इससे यह साफ होता है कि वह अपने आर्थिक हितों को बचाना चाहता है, लेकिन किसी बड़े युद्ध में फंसने से बच रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति चीन की रणनीति की एक बड़ी कमजोरी भी उजागर करती है। केवल आर्थिक ताकत और निवेश के जरिए प्रभाव बढ़ाना संभव है, लेकिन जब हालात युद्ध जैसे हो जाते हैं, तब असली ताकत सैन्य शक्ति से ही तय होती है। कुल मिलाकर, ईरान के आसपास चल रहा यह संघर्ष चीन के लिए एक बड़ा टेस्ट बन गया है। यह तय करेगा कि क्या वह सिर्फ आर्थिक ताकत बना रहेगा या भविष्य में एक मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर पाएगा।
