ब्रिटेन का चीन पर बड़ा एक्शन, विश्वविद्यालयों से चीनी रिसर्च संस्थान से सहयोग खत्म करने को कहा

punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2026 - 06:12 PM (IST)

नेशनल डेस्क : ब्रिटेन की सरकार ने बुधवार को ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों से चीन के एक शोध संस्थान के साथ सहयोग बंद करने को कहा क्योंकि ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी एमआई5 का मानना है कि यह संस्थान जासूसी गतिविधियों के केन्द्र के रूप में काम करता है। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने देश के शिक्षाविदों से 'चाइना जनरल टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट' के साथ सभी तरह के सहयोग समाप्त करने को कहा। वहीं ब्रिटेन स्थित चीन के दूतावास ने इन आरोपों को खारिज किया और इन्हें 'काल्पनिक और पूरी तरह मनगढ़ंत' बताया। दूतावास के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ''हम इस तरह के निराधार आरोपों का दृढ़ता से विरोध करते हैं और हमने इस मामले में ब्रिटेन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।''

एमआई5 के अनुसार, ब्रिटेन से जुड़े 100 से अधिक शिक्षाविदों ने ऐसी परियोजनाओं पर काम किया है, जिनके लिए कथित तौर पर चीनी खुफिया एजेंसियों ने इस शोध संस्थान के माध्यम से गुप्त रूप से धन मुहैया कराया। इन परियोजनाओं में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम मेधा, गुप्त संचार प्रणालियों और स्टेग्नोग्राफी (संदेशों को छिपाने की तकनीक) से जुड़े शोध शामिल थे। एमआई5 का कहना है कि इस संस्थान के 'चाइनीज मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी' से बेहद मजबूत संबंध हैं और वह ऐसे शोध के लिए धन जुटाने की कोशिश करता है जिससे चीन की जासूसी क्षमताओं को तकनीकी रूप से मजबूत किया जा सके।

ब्रिटिश खुफिया एजेंसियां हाल के वर्षों में चीन से जुड़े जासूसी खतरों को लेकर अपनी चेतावनियां लगातार बढ़ा रही हैं। चीन ब्रिटेन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। एक साल पहले एमआई5 के महानिदेशक केन मैक्कलम ने कहा था कि चीन की सरकार में मौजूद लोग ब्रिटेन के लिए 'हर दिन' सुरक्षा खतरा पेश करते हैं। जून में खुफिया साझेदारी वाले देशों 'फाइव आई'-अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा ने चेतावनी दी थी कि चीन के जासूस सैन्य और सरकारी कर्मचारियों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए नौकरी से जुड़ी वेबसाइटों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जार्विस ने कहा कि एमआई5 की चेतावनी से यह सामने आता है कि चीनी खुफिया एजेंसियां ब्रिटिश शिक्षाविदों की विशेषज्ञता और शोध से गुप्त रूप से लाभ उठाने की कोशिश कर रही हैं, जिससे ब्रिटेन और उसके सहयोगियों की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को पत्र लिखकर कहा है कि वे अपने कर्मचारियों को इस संस्थान के साथ सभी तरह के सहयोग समाप्त करने में मदद करें।

जार्विस के अनुसार, इस शोध संस्थान के साथ सहयोग करना राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन भी हो सकता है। इन आरोपों के सामने आने के बाद चीन के दूतावास ने कहा कि ब्रिटेन और चीन के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग स्वैच्छिक है और कानूनों तथा नियमों के अनुरूप होता है। दूतावास ने कहा कि ऐसे आदान-प्रदान और सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होता है तथा ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों को 'झूठ फैलाना' और दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग को नुकसान पहुंचाना बंद करना चाहिए।


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News Editor

Parveen Kumar

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