चीन की पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती! BLA ने बलूचिस्तान से खदेड़े चीनी प्रोजेक्ट, ग्वादर में सभी ग्राउंड ऑपरेशन किए बंद
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 01:00 PM (IST)
Islamabad: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से एक ऐतिहासिक बदलाव की खबर आ रही है। बलूच विद्रोहियों (BLA) के भीषण हमलों और रणनीतिक बढ़त के आगे पाकिस्तान की सेना और चीनी ड्रैगन दोनों बेबस नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ने ग्वादर में अपने सभी ग्राउंड ऑपरेशंस (जमीनी परियोजनाएं) सस्पेंड कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि BLA के लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना को पीछे धकेलते हुए दर्जनों सैन्य शिविरों और चौकियों पर कब्जा कर लिया है। बलूचिस्तान के लगभग 10 जिलों में अब विद्रोही समूहों का नियंत्रण बताया जा रहा है। जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना अपने ही देश के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित रखने में नाकाम साबित हुई है।
चीन के पीछे हटने के मुख्य कारण
- चीन को अहसास हो गया है कि पाकिस्तान अब उसके निवेश और नागरिकों को सुरक्षा देने में सक्षम नहीं है।
- BLA की 'मजीद ब्रिगेड' द्वारा किए गए लगातार आत्मघाती हमलों ने चीनी इंजीनियरों और अधिकारियों में डर पैदा कर दिया है।
- चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), जिसे पाकिस्तान की तकदीर बदलने वाला बताया गया था, अब पूरी तरह ठप पड़ता दिख रहा है।
क्यों बढ़ा बलूच जनता का आक्रोश?
- बलूचिस्तान के लोगों का आरोप है कि चीन और पाकिस्तान ने मिलकर उनकी जमीन को 'ओपन एयर जेल' बना दिया।
- ग्वादर के स्थानीय मछुआरों को समुद्र में जाने से रोका गया, जिससे उनकी आजीविका खत्म हो गई।
- संसाधनों की लूट: चीन के प्रोजेक्ट्स को बिजली-पानी मिला, जबकि स्थानीय लोग प्यासे और अंधेरे में रहे।
- चीन का विरोध करने वाले बलूच युवाओं को पाकिस्तानी सेना द्वारा 'गायब' कर दिया गया, जिसके कारण जनता में भारी उबाल है।
बलूचिस्तान में मौजूदा सैन्य और राजनीतिक स्थिति बहुत जटिल है। जानें किन क्षेत्रों में संघर्ष सबसे तीव्र है और चीन ने किन प्रोजेक्ट्स से हाथ खींचे हैं।
- बलूचिस्तान के 10 जिलों में स्थिति सबसे नाजुक है, जहाँ सरकारी नियंत्रण लगभग समाप्त होने के कगार पर है
- ग्वादर और कोस्टल बेल्ट (Gwadar - The Epicenter): यह चीन के $62 बिलियन के CPEC प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र है। यहाँ चीनी इंजीनियरों पर 'मजीद ब्रिगेड' के आत्मघाती हमलों के बाद अब सभी जमीनी काम बंद हैं।
- ये जिले BLA के सबसे मजबूत गढ़ हैं। यहाँ पाकिस्तानी सेना की सप्लाई लाइन्स को विद्रोहियों ने पूरी तरह काट दिया है।
- यहाँ प्राकृतिक गैस के भंडार हैं। यहाँ के विद्रोही समूहों ने पाइपलाइनों और सरकारी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है।
- यह क्वेटा को सिंध से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। BLA ने पुलों और रेल पटरियों को निशाना बनाकर सेना की आवाजाही को ठप कर दिया है।
- चीन के पीछे हटने का मतलब केवल ग्वादर पोर्ट ही नहीं है, बल्कि कई अन्य बड़े निवेश भी संकट में हैं:
- ग्वादर इंटरनेशनल एयरपोर्ट: सुरक्षा कारणों से इसके संचालन और अंतिम चरणों के काम पर रोक लगा दी गई है।
- सड़क और रेल नेटवर्क (Main Line-1): CPEC के तहत बन रहे हाईवे का काम बलूच विद्रोहियों के हमले के डर से रुक गया है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ): जिन क्षेत्रों में फैक्ट्रियां लगनी थीं, वहां अब सन्नाटा है क्योंकि कोई भी चीनी अधिकारी वहां रहने को तैयार नहीं है।
पाकिस्तानी सेना के लिए बड़ी चुनौतियां
पाकिस्तानी सेना के लिए यह युद्ध केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। सेना के शिविरों (Camps) पर कब्जा होने से जवानों का मनोबल गिर रहा है।चीन का निवेश रुकने से पाकिस्तान का 'डिफ़ॉल्ट' होने का खतरा फिर से बढ़ गया है। स्थानीय जनता का सेना पर से विश्वास पूरी तरह उठ चुका है, जिससे 'इंटेलिजेंस' मिलना बंद हो गया है। यदि हमले जारी रहे, तो चीन अपने शेष नागरिकों को निकालने के लिए विशेष विमान भेज सकता है। पाकिस्तान सेना क्वेटा और आसपास के इलाकों में एक 'अंतिम युद्ध' (Final Push) जैसा बड़ा ऑपरेशन शुरू कर सकती है, जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन की खबरें और बढ़ेंगी।
