पुरुष-प्रधान सत्ता की ओर बांग्लादेशः चुनाव में सिर्फ 4% महिला उम्मीदवार, लोकतंत्र पर उठे गंभीर सवाल
punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 06:59 PM (IST)
International Desk: दशकों तक दो प्रभावशाली महिला नेताओं के इर्द-गिर्द घूमने वाली बांग्लादेश की राजनीति आज एक असामान्य शून्य से गुजर रही है। 2024 के हिंसक जनआंदोलन के बाद होने जा रहे पहले संसदीय चुनावों से पहले देश के राजनीतिक परिदृश्य में महिलाओं की भागीदारी लगभग गायब हो चुकी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के दिसंबर 2025 में निधन और शेख हसीना के जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद निर्वासन में चले जाने से वह दौर समाप्त हो गया, जब 1991 से 2024 तक बांग्लादेश पर लगभग लगातार महिला नेतृत्व रहा। कभी दक्षिण एशिया में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक माने जाने वाला यह देश अब बढ़ते कट्टरपंथ और उग्रवाद के दौर में प्रवेश करता दिख रहा है।
आगामी 12 फरवरी के चुनावों में 300 संसदीय सीटों के लिए कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से केवल 76 महिलाएं हैं यानी चार प्रतिशत से भी कम। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि खुले तौर पर धमकियों, डराने-धमकाने और हिंसा के माहौल के कारण महिलाएं चुनाव लड़ने से पीछे हट रही हैं। मौजूदा मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में कट्टरपंथी ताकतों के प्रभाव के बढ़ने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई राजनीतिक दलों ने पुरुष उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी जैसी बड़ी इस्लामी पार्टी ने एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारी है।
चिंता का विषय यह भी है कि महिलाओं को न केवल राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेला जा रहा है, बल्कि उन्हें ऑनलाइन और ऑफलाइन हिंसा का भी सामना करना पड़ रहा है। नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) की उम्मीदवार दिलशाना परुल ने कहा कि उन्हें लगातार साइबर ट्रोलिंग, चरित्र हनन और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके चुनावी कार्यकर्ताओं पर भी हमले किए गए हैं।इसी तरह, नबिला तसनीद और तसलीमा अख्तर जैसी महिला उम्मीदवारों ने बैनर फाड़ने, गलत सूचनाएं फैलाने और संस्थागत उदासीनता की शिकायत की है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, चुनाव लड़ रही 51 पार्टियों में से 30 पार्टियों ने एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारी।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर उत्पीड़न, राजनीतिक हिंसा, वैचारिक बाधाएं और संस्थागत समर्थन की कमी मिलकर बांग्लादेश की समावेशी लोकतांत्रिक पहचान पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बांग्लादेश की राजनीति, जो दशकों तक शेख हसीना और खालिदा जिया के नेतृत्व में रही, अब महिला प्रतिनिधित्व के गंभीर संकट से जूझ रही है। आगामी चुनावों में केवल चार प्रतिशत महिला उम्मीदवार हैं, जबकि कट्टरपंथ, धमकियां और साइबर उत्पीड़न महिलाओं को राजनीति से बाहर धकेल रहे हैं।
