दुर्लभ खोज में उल्टी ने खोले राज, 29 करोड़ साल पहले कैसा था शिकारी का आहार

punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 05:52 PM (IST)

International Desk: वैज्ञानिकों ने जर्मनी के ब्रॉमाकर जीवाश्म स्थल से एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाली खोज की है लगभग 29 करोड़ वर्ष पुरानी जीवाश्मीकृत उल्टी (Regurgitalite)। यह खोज प्रारंभिक पर्मियन काल के एक प्राचीन शिकारी के आहार व्यवहार पर नई रोशनी डालती है। शोधकर्ताओं को आंशिक रूप से पची हुई हड्डियों का एक सघन समूह मिला, जिसमें तीन अलग-अलग जानवरों के अवशेष थे। इन हड्डियों में कोई नियमित आकार या मल जैसी संरचना नहीं थी, जिससे संकेत मिला कि यह कोप्रोलाइट (जीवाश्मीकृत मल) नहीं बल्कि शिकारी द्वारा उगले गए अवशेष हैं।

 

रासायनिक विश्लेषण के लिए माइक्रो-एक्सआरएफ तकनीक का उपयोग किया गया, जिसमें हड्डियों के आसपास फॉस्फोरस की लगभग पूरी कमी पाई गई। यह विशेषता रीगर्जिटालाइट की पहचान मानी जाती है, क्योंकि कोप्रोलाइट में पाचन की लंबी प्रक्रिया के कारण फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा, सीटी स्कैन के जरिए इस जीवाश्म का त्रि-आयामी परीक्षण किया गया, जिससे प्रत्येक हड्डी की सटीक पहचान संभव हुई। जांच से पुष्टि हुई कि एक ही शिकारी ने अलग-अलग आकार के तीन जानवरों को निगला था और बाद में उन्हें आंशिक रूप से उगल दिया।

 

वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रॉमाकर स्थल से दो ऐसे मांसाहारी साइनैप्सिड ज्ञात हैं जो इस तरह का शिकार निगल सकते थे डाइमेट्रोडॉन और टैम्बाकार्निफेक्स। यह खोज न केवल स्थलीय कशेरुकी जीव की अब तक की सबसे प्राचीन जीवाश्मीकृत उल्टी मानी जा रही है, बल्कि यह प्रारंभिक स्तनधारी-पूर्वजों के भोजन व्यवहार को समझने के लिए भी एक नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह अध्ययन हाल ही में Scientific Reports पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।


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Content Writer

Tanuja

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