वैश्विक व्यापार पर ईरान युद्ध का साया: दुनिया की प्रमुख कंपनी ने खाड़ी देशों के लिए कार्गो बुकिंग रोकी, इमरजेंसी फ्रेट चार्ज लागू
punjabkesari.in Tuesday, Mar 10, 2026 - 07:08 PM (IST)
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और सुरक्षा संकट का असर अब वैश्विक व्यापार और शिपिंग नेटवर्क पर भी दिखाई देने लगा है। दुनिया की प्रमुख कंटेनर शिपिंग कंपनी मैरस्क Maersk ने क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कई खाड़ी देशों के लिए कार्गो बुकिंग अस्थायी रूप से निलंबित कर दी है। कंपनी ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति बेहद अस्थिर है और कर्मियों की सुरक्षा, कार्गो की सुरक्षा और नेटवर्क स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
All bookings suspended till 21 March by Maersk.
— Ajay Joshi Chemicals (@JoshiEien) March 10, 2026
Many plants will have to shut down temporarily now as no inventories. pic.twitter.com/tLeD7KJVSC
इन देशों के लिए कार्गो बुकिंग पर रोक
कंपनी के अनुसार कई प्रकार के कार्गो के लिए बुकिंग रोक दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
- संयुक्त अरब अमीरात
- ओमान
- इराक
- कुवैत
- कतर
- बहरीन
- सऊदी अरब
- जॉर्डन
इन देशों के लिए रीफर, डेंजरस गुड्स, आउट-ऑफ-गेज और ड्राई कार्गो की नई बुकिंग फिलहाल रोक दी गई है। हालांकि कुछ बंदरगाहों जैसे जेद्दा, किंग अब्दुल्ला पोर्ट और सलालाह के लिए सीमित सेवाएं जारी रखी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता सैन्य तनाव है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और व्यापार मार्गों में से एक है, जहां किसी भी सैन्य टकराव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
इमरजेंसी फ्रेट चार्ज लागू
- कंपनी ने वैकल्पिक रूट और अस्थायी स्टोरेज के लिए इमरजेंसी फ्रेट चार्ज भी लागू किया है:
- 20 फुट ड्राई कंटेनर – 1800 डॉलर
- 40 फुट ड्राई कंटेनर – 3000 डॉलर
- रीफर, स्पेशल और डेंजरस कंटेनर – 3800 डॉलर
- यह शुल्क उन कार्गो पर लागू होगा जो खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाहों से जुड़े हैं।
वैकल्पिक रूट और स्टोरेज की व्यवस्था
कंपनी ने कहा कि कई शिपमेंट के लिए वैकल्पिक मार्ग और अस्थायी स्टोरेज की व्यवस्था की जा रही है ताकि कार्गो सुरक्षित रखा जा सके।हालांकि स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिनों में नियमों में बदलाव संभव है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
