पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव: तालिबान ने सीमा पार आतंकवाद के आरोपों को नकारा, इस्लामाबाद को दी कूटनीति की सलाह
punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 03:10 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाले प्रशासन ने सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के आरोपों को खारिज कर दिया है। काबुल ने इस्लामाबाद से कहा है कि वह बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय, कूटनीति और बातचीत के जरिए अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करे।
टोलो न्यूज के अनुसार, अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने CNN को दिए एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं। उन्होंने हाल की हिंसा में मारे गए या घायल हुए नागरिकों का जिक्र करते हुए दोनों पड़ोसी देशों के बीच अधिक रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। बल्खी ने बताया कि 2022 की शुरुआत से अब तक हुए हमलों में 1,119 नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं। उन्होंने एक पुनर्वास केंद्र (रिहैबिलिटेशन सेंटर) में मौजूद पीड़ितों का भी जिक्र किया। अफगान प्रवक्ता ने अफगान क्षेत्र से आतंकी गतिविधियों के संचालन को लेकर पाकिस्तान द्वारा बार-बार लगाए जा रहे आरोपों की आलोचना की और पाकिस्तान से कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाने को कहा।
काबुल ने पाकिस्तान से कूटनीति अपनाने की अपील की
पाकिस्तान के सुरक्षा संबंधी आरोपों का जवाब देते हुए, बल्खी ने पाकिस्तानी अधिकारियों से कहा कि वे अपनी जनता के साथ जुड़ें और अफगानिस्तान के साथ कूटनीतिक समझ बनाने की कोशिश करें। ये बयान इस्लामाबाद और काबुल के बीच सीमा पार आतंकवाद और इस क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों से निपटने की जिम्मेदारी को लेकर चल रहे विवाद को दर्शाते हैं। पाकिस्तान ने बार-बार उन आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिन पर उसका आरोप है कि वे अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर हमले करने के लिए करते हैं।
हालांकि, तालिबान प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा समस्याओं के लिए अफगानिस्तान जिम्मेदार है। सीमा पार लगातार हो रही शत्रुता के कारण दोनों देशों के संबंध खराब हो गए हैं। अफगान अधिकारियों ने बार-बार पाकिस्तानी सैन्य अभियानों की निंदा की है। उनका कहना है कि इन अभियानों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे नागरिकों की जान गई या वे घायल हुए।
पाकिस्तानी हवाई हमलों से नागरिकों की मौतें बढ़ीं
अफगानिस्तान में हाल के सैन्य अभियानों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। टोलो न्यूज के अनुसार, पिछले महीने कुनार प्रांत में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इन हमलों में पक्तिका प्रांत के कुछ इलाकों को भी निशाना बनाया गया। दोनों पक्षों के बीच अपनी साझा सीमा पर सुरक्षा स्थिति को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान के तालिबान-नेतृत्व वाले प्रशासन पर जोर दिया है कि वे उग्रवादी समूहों को अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल करके पाकिस्तान में हमले करने से रोकें। वहीं, काबुल ने अफगानिस्तान के भीतर की जाने वाली सैन्य कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। आरोपों का यह ताजा दौर ऐसे समय में आया है जब वहां लगातार हिंसा हो रही है और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी नाकाम रही हैं।
काबुल ने शहबाज शरीफ के दावों को किया खारिज
इस महीने की शुरुआत में, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उन टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिनमें उन्होंने अफगान क्षेत्र से आतंकवाद पनपने का आरोप लगाया था। अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर काबुल के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने और दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशों को कमजोर करने का आरोप लगाया। मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी घरेलू राजनीतिक, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक मुश्किलों को सुलझाने के बजाय प्रोपेगैंडा (प्रचार) को ज्यादा अहमियत दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की इन मुश्किलों का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।
ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री शरीफ के उस बयान के बाद आईं, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान से जुड़ी उग्रवादी गतिविधियों को पाकिस्तान के लिए सुरक्षा खतरा बताया था। इससे दोनों सरकारों के बीच लगातार बने मतभेद सामने आते हैं।
सीमा पार उग्रवाद मुख्य विवाद बना हुआ है
बल्खी और मुजाहिद के ताजा बयानों से पता चलता है कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर इस्लामाबाद और काबुल के रुख में कितना बड़ा अंतर है। पाकिस्तान ने बार-बार तालिबान प्रशासन से उन उग्रवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है, जो उसके अनुसार अफगान क्षेत्र से काम करते हैं और पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। सीमा पार सैन्य अभियानों, नागरिकों के हताहत होने की खबरों और कूटनीतिक प्रयासों की प्रभावशीलता पर असहमति ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। जहां पाकिस्तानी अधिकारी अफगान क्षेत्र से जुड़े उग्रवाद को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं, वहीं तालिबान-नेतृत्व वाले प्रशासन का कहना है कि अफगानिस्तान पर आरोप लगाने से पाकिस्तान की सुरक्षा समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकलेगा। बयानों के इस आदान-प्रदान ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच की खाई को और उजागर कर दिया है। उग्रवाद, सैन्य अभियानों और क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों की जिम्मेदारी को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं, जिसके कारण उनके संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।
