मौसमी बदलाव के साथ फ्लू जैसे रोग और पेट संक्रमण में बढ़ोतरी, माता-पिता क्या रखें ध्यान?
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 11:51 PM (IST)
(वेब डेस्क): मौसमी बदलाव के बीच क्षेत्र के डॉक्टरों ने फ्लू जैसे वायरल संक्रमण और गंभीर बीमारियों के मामलों में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की है। अस्पतालों की ओपीडी में तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में दर्द, बदन दर्द, सिरदर्द और लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान से पीड़ित बच्चों को लेकर अभिभावकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई मामलों में लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण से अधिक समय तक बने रह रहे हैं, जिससे बच्चों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और माता-पिता की चिंता बढ़ रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, अचानक मौसम में उतार-चढ़ाव, बढ़ी हुई नमी, बंद और भीड़भाड़ वाले स्थानों में अधिक समय बिताना तथा मौसमी बदलाव के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर होना इसकी प्रमुख वजहें हैं। स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती सामाजिक गतिविधियों ने खासकर बच्चों में संक्रमण के प्रसार को और तेज कर दिया है।
श्वसन संबंधी बीमारियों के साथ-साथ वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट का संक्रमण) के मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में। इसके सामान्य लक्षणों में उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़, भूख न लगना, बुखार और शरीर में पानी की कमी शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है और अस्पताल में भर्ती की नौबत आ सकती है।
मोहाली स्थित मदरहुड हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिशियन एवं नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. सनी नरूला ने बताया, “पिछले कुछ हफ्तों में हमारी पीडियाट्रिक ओपीडी में हर सप्ताह लगभग 50 बच्चे वायरल और फ्लू जैसे लक्षणों के साथ आ रहे हैं। मौसमी बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव बच्चों की इम्युनिटी को कमजोर करता है, जिससे वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इस बार लक्षण ज्यादा गंभीर हैं और ठीक होने में समय भी अधिक लग रहा है। कई अभिभावक इसे साधारण सर्दी-जुकाम या हल्का पेट दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन देर से इलाज स्थिति को बिगाड़ सकता है।”
डॉक्टरों ने माता-पिता को चेतावनी दी है कि यदि बुखार तीन दिन से अधिक रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, बच्चा अत्यधिक सुस्त हो जाए, दूध या भोजन लेने से मना करे, बार-बार उल्टी हो या बार-बार पतले दस्त हों जिससे डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बीमारी का निदान मुख्य रूप से लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और क्लिनिकल जांच के आधार पर किया जाता है। कुछ मामलों में रक्त जांच, गले का स्वैब या स्टूल टेस्ट की सलाह दी जा सकती है, ताकि बैक्टीरियल संक्रमण या जटिलताओं को नकारा किया जा सके। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता नहीं होती और इन्हें केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लिया जाना चाहिए।
इलाज और देखभाल को लेकर डॉ. सनी ने कहा,“सपोर्टिव केयर ही उपचार का मुख्य आधार है। पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, आराम, बुखार नियंत्रित करने की दवाएं और सही पोषण बेहद जरूरी हैं। वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस के मामलों में समय पर ओआरएस देना और बच्चे की स्थिति पर नजर रखना जटिलताओं और अस्पताल में भर्ती से बचा सकता है।”
संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को बार-बार धोना, साफ और सुरक्षित पानी पीना, स्वच्छता बनाए रखना, बीमार होने पर भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचना और लक्षण होने पर मास्क पहनना जैसे सरल उपाय काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
जैसे-जैसे मौसमी संक्रमण बढ़ रहे हैं, समय पर डॉक्टर से परामर्श, सही देखभाल और स्वयं दवा लेने से बचना बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है।
