स्टूडेंट ने ब्लाइंड लोगों के लिए बनाया “संकट मोचन” ऐप, एप्पल हेडक्वाटर्स से आया बुलावा
punjabkesari.in Saturday, Apr 25, 2026 - 03:58 PM (IST)
पीयूष पंजाबी : टेक्नोलॉजी अब सिर्फ सुविधा तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि यह लोगों की जिंदगी बदलने का जरिया भी बन रही है। इसका ताजा उदाहरण हैं चितकारा यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट निमर शर्मा, जिन्होंने अपने इनोवेटिव ऐप Blind Bridge ‘संकट मोचन’ के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
निमर शर्मा ने “ऐपल स्विफ्ट स्टूडेंट चैलेंज 2026” में हिस्सा लिया था। यह एक प्रतियोगिता है जो ऐपल द्वारा आयोजित की जाती है। इसमें दुनिया भर के छात्र आईओएस प्लेटफार्म पर अपने इनोवेटिव ऐप्स पेश करते हैं। निमर का बनाया यह ऐप खास तौर पर दृष्टिबाधित लोगों के लिए है। यह ऐप आईओएस पर काम करता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए न इंटरनेट चाहिए और न कोई अलग डिवाइस। यूज़र को सिर्फ अपना आईफ़ोन सामने रखना होता है और ऐप आसपास की चीजों को पहचानकर वाइब्रेशन के जरिए जानकारी देता है।

आसान शब्दों में समझें तो यह ऐप रास्ते में आने वाली दीवार, गड्ढे, ढलान या किसी भी रुकावट को महसूस कराता है। हर तरह की स्थिति के लिए अलग-अलग वाइब्रेशन सिग्नल दिए जाते हैं, जिससे यूज़र समझ पाता है कि आगे क्या है। यह पूरा सिस्टम हैप्टिक फीडबैक पर आधारित है, जो बिना देखे भी यूज़र को दिशा समझने में मदद करता है। खास बात यह है कि यह ऐप अनजान जगहों पर भी सुरक्षित चलने में मदद कर सकता है।
आपको बता दें, चितकारा यूनिवर्सिटी में ऐपल के सहयोग से “सुपरचार्ज 2026” जैसी पहल के तहत छात्रों को ऐपल की टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका दिया जा रहा है। आईओएस पर काम करते हुए स्टूडेंट्स नए-नए आइडियाज़ लेकर आ रहे हो ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बना रहे हैं।
निमर की यह उपलब्धि उन्हें अब अमेरिका स्थित ऐपल हेडक्वार्टर्स तक ले जा रही है, जहां वे अपने प्रोजेक्ट को दुनिया के सामने पेश करेंगे। एक्सपर्ट्स की माने तो ‘संकट मोचन’ जैसे इनोवेशन आने वाले समय में लाखों लोगों की जिंदगी आसान बना सकते हैं। यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसा समाधान है जो तकनीक को इंसानियत से जोड़ता है।
