ChatGPT में आया नया 'Lockdown Mode', हैकर्स भी नहीं लगा पाएंगे आपकी सीक्रेट चैट्स में सेंध, जानें कैसे करेगा काम?
punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 08:47 AM (IST)
ChatGPT Lockdown Mode : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज हमारी जिंदगी और दफ्तर के कामकाज का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है लेकिन जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है वैसे-वैसे डेटा लीक और हैकिंग का खतरा भी तेज हो गया है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने एक क्रांतिकारी सुरक्षा कवच पेश किया है जिसे 'लॉकडाउन मोड' (Lockdown Mode) नाम दिया गया है।
यह फीचर उन लोगों के लिए एक वरदान की तरह है जो बेहद गोपनीय फाइलों, संवेदनशील सरकारी या कॉर्पोरेट डेटा पर काम करते हैं। राहत की बात यह है कि ओपनएआई ने इसे भेदभाव के बिना फ्री और पेड दोनों ही तरह के यूजर्स के लिए जारी किया है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह मोड कैसे काम करता है और आपको इसकी जरूरत क्यों है।

क्यों लॉन्च हुआ Lockdown Mode?
OpenAI के मुताबिक इस फीचर को पारंपरिक हैकिंग से अलग, एआई की दुनिया के एक नए और बड़े खतरे से निपटने के लिए बनाया गया है जिसे 'प्रॉम्प्ट इंजेक्शन अटैक' (Prompt Injection Attack) कहते हैं। इसमें साइबर अपराधी किसी वेबसाइट, पीडीएफ फाइल या डिजिटल डॉक्यूमेंट के अंदर कुछ ऐसे गुप्त निर्देश (कोडिंग) छिपा देते हैं जिन्हें आम इंसान नहीं देख पाता लेकिन एआई चैटबॉट उसे पढ़ लेता है।
यदि यूजर उस संक्रमित फाइल को चैटजीपीटी में अपलोड करता है तो एआई उन छिपे हुए गलत निर्देशों के जाल में फंस जाता है। इसके बाद हैकर्स एआई के जरिए यूजर की अन्य पर्सनल जानकारियां चुरा सकते हैं या चैटबॉट के व्यवहार को बदल सकते हैं। Lockdown Mode इसी अदृश्य खतरे को रोकने के लिए एआई के ऊपर एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी करता है।
जैसे ही कोई यूजर अपनी सेटिंग में जाकर इस मोड को एक्टिव (सक्रिय) करता है चैटजीपीटी सामान्य से कई गुना अधिक सतर्क हो जाता है। इस दौरान कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं। यूजर्स पहले की तरह ही फाइलों को अपलोड कर सकते हैं एआई को तस्वीरें भेज सकते हैं और नई इमेजेस (DALL-E) भी बनवा सकते हैं।
इंटरनेट ब्राउजिंग पर लगाम: बाहरी दुनिया से आने वाले खतरों को रोकने के लिए चैटजीपीटी इंटरनेट से जुड़ी कुछ सुविधाओं पर अतिरिक्त कंट्रोल लगा देता है। उदाहरण के लिए यह संदिग्ध ऑनलाइन वेबसाइट्स से सीधे तस्वीरें लेने या उन्हें आपके जवाब में दिखाने से बचेगा।

एडवांस्ड फीचर्स पर रोक: इस सुरक्षा घेरे को मजबूत रखने के लिए चैटजीपीटी के दो सबसे शक्तिशाली फीचर्स— 'डीप रिसर्च' (Deep Research) और 'एजेंट मोड' (Agent Mode) इस दौरान बंद हो जाते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि ये फीचर्स इंटरनेट पर बहुत गहराई से सर्च करते हैं जिससे वायरस या हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं ओपनएआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह फीचर हर किसी के लिए अनिवार्य नहीं है बल्कि यह यूजर की जरूरत पर निर्भर करता है। जो लोग सिर्फ सामान्य सवाल-जवाब, निबंध लिखने या कोडिंग सीखने के लिए चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं उन्हें रोजमर्रा में इस मोड की खास जरूरत नहीं पड़ेगी।

इन प्रोफेशनल्स के लिए है जरूरी
पत्रकारों (Journalists), रिसर्चर्स, कॉरपोरेट अधिकारियों, सरकारी विभागों और उन संगठनों के लिए यह मोड बेहद जरूरी है जहां एक छोटी सी भी डेटा चूक (Security Lapse) भारी नुकसान पहुंचा सकती है। भले ही इसे चालू करने से कुछ फीचर्स का इस्तेमाल सीमित हो जाता है लेकिन डेटा की 100% सुरक्षा के लिए यह समझौता काफी फायदेमंद है।
जैसे-जैसे तकनीक एडवांस हो रही है प्राइवेसी सबसे बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। चैटजीपीटी का यह नया कदम यह साबित करता है कि भविष्य में एआई कंपनियां केवल फीचर्स बढ़ाने पर नहीं बल्कि यूजर्स को एक सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल माहौल देने पर सबसे ज्यादा फोकस करेंगी।
