Pan Card New Update: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नहीं, अब इन जरूरी दस्तावेजों से तय होगी मृतक की असली उम्र, जानें क्या है नया नियम?
punjabkesari.in Wednesday, May 20, 2026 - 02:48 PM (IST)
Pan Card New Update : राजस्थान हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जो दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मिलने वाले इंश्योरेंस क्लेम (बीमा मुआवजे) के नियमों को पूरी तरह बदल देगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि किसी भी हादसे में मृतक की सटीक उम्र और आय तय करने के लिए डॉक्टरों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं बल्कि पैन कार्ड (PAN Card), ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) ही सबसे पुख्ता सबूत माने जाएंगे।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद एक पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे की रकम में करीब ₹15 लाख का बड़ा इजाफा हुआ है। यह पूरा मामला मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) के एक पुराने फैसले के खिलाफ दायर की गई अपीलों पर सुनवाई का है। हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप तनेजा की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानून की नई और स्पष्ट व्याख्या की।
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1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट सिर्फ अंदाजा, पैन-लाइसेंस ही सर्वमान्य
अदालत में पीड़ितों के परिवार ने दलील दी कि ट्रिब्यूनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार मानकर मृतक की उम्र 48 साल तय कर दी थी जबकि उसके पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस में उम्र केवल 41 वर्ष थी।
जस्टिस संदीप तनेजा की दो-टूक: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का मुख्य काम सिर्फ मौत की वजह (Cause of Death) बताना है। उसमें लिखी गई उम्र केवल डॉक्टर का एक अनुमान या अंदाजा होती है। इसके विपरीत, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस सरकारी एजेंसियों द्वारा गहन जांच और प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर जारी किए जाते हैं इसलिए इनकी विश्वसनीयता सबसे ज्यादा है।

2. मनगढ़ंत आय नहीं, ITR बनेगा आधार
मुआवजे की रकम तय करने के लिए मृतक की कमाई का आकलन भी एक बड़ा मुद्दा था। हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि दुर्घटना वाले साल में मृतक द्वारा भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को ही उसकी वास्तविक आय का अंतिम सबूत माना जाएगा। इस फैसले के लिए हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े मामलों का हवाला भी दिया:
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निधि भार्गव बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड
टीओ एंथनी बनाम करवरनन

दुर्घटना के लिए दोनों ड्राइवरों को माना जिम्मेदार
इस सड़क हादसे की जांच करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह दुर्घटना तेज रफ्तार और दोनों तरफ के ड्राइवरों की लापरवाही के कारण हुई थी। अदालत ने इस मामले में योगदायी लापरवाही (Contributory Negligence) के सिद्धांत को सही ठहराया। कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के उस फैसले पर मुहर लगाई जिसमें इंश्योरेंस क्लेम की देनदारी को दोनों पक्षों के बीच 75:25 के अनुपात (Ratio) में बांटने की बात कही गई थी (जिसमें ट्रक चालक की लापरवाही का हिस्सा ज्यादा था)।

आम आदमी पर इस फैसले का सीधा असर
इस फैसले का सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जो सड़क हादसों में अपने प्रियजनों को खो देते हैं। उम्र कम होने और आय का सही आकलन होने से क्लेम की राशि बढ़ जाती है। इस मामले में भी जब पैन कार्ड (41 वर्ष की उम्र) और ITR के आधार पर मुआवजे का दोबारा गणित लगाया गया तो पीड़ितों के परिवार का मुआवजा करीब 15 लाख रुपये और बढ़ गया।
