द रिवोल्यूशनरीज में दिखेगी उन क्रांतिकारियों की कहानी, जिन्होंने आजादी की चिंगारी जलाई : निखिल आडवाणी

punjabkesari.in Thursday, Sep 10, 2026 - 02:39 PM (IST)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की कहानी पर बनी सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ जल्द ही दर्शकों के बीच आने वाली है। निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी इस सीरीज में भुवन बाम, रोहित सराफ, प्रतिभा रांटा और गुरफतेह पीरजादा मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। ये चारों कलाकार रास बिहारी बोस, सचिंद्र नाथ सान्याल, प्रतिभा लाहिरी और बाघा जतिन जैसे क्रांतिकारियों की भूमिका निभा रहे हैं। संजीव सान्याल की किताब ‘रिवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित यह सीरीज ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले क्रांतिकारियों की कहानी दिखाएगी। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ 11 सितंबर 2026 को Prime Video पर दुनियाभर में स्ट्रीम होगी। सीरीज की स्टारकास्ट ने पंजाब केसरी, नवोदय टाइम्स, जगबाणी और हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश... 

निखिल आडवाणी

सवाल: फ्रीडम एट मिडनाइट के बाद अब द रिवोल्यूशनरीज सीरीज लगता है आप आजादी के दौर की कहानियों के पीछे पड़ गए हैं?

पता नहीं, लेकिन लगता है कि मेरे दिमाग में इस समय एक फेज चल रहा है। मैं देशभक्ति के कॉन्सेप्ट पर बात करना चाहता था। मुझे लगता है कि हम भूल गए हैं कि देशभक्ति बहुत व्यक्तिगत चीज होती है और हम अपने नेताओं को कहीं न कहीं हल्के में लेने लगे हैं।  द रिवोल्यूशनरीज में मुझे लगा कि इन लोगों ने जो चिंगारी लगाई थी, वह कई पीढ़ियों और दशकों तक आगे बढ़ती रही। रासबिहारी बोस, बाघा जतिन, सचिंद्रनाथ सान्याल जैसे लोगों ने जो शुरुआत की, वह आगे चलकर उधम सिंह और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों तक पहुंची। सच कहूं तो अगर कोई मुझे कहे कि जो उन्होंने किया, वह करो, तो मुझे नहीं लगता कि मैं ऐसा कर पाऊंगा।

सवाल: कलाकारों से इतनी मुश्किल भूमिकाएं कैसे करवा लेते हैं?

मुझे लगता है कि हम सब सही समय पर एक-दूसरे से मिले। हम सभी कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिसे लेकर हम उत्साहित हों और जिसमें अपनी पूरी मेहनत लगा सकें। इसलिए मुझे किसी को ज्यादा मनाना नहीं पड़ा। मैंने बस उन्हें बताया कि मैं यह सीरीज बना रहा हूं, अमेजन इसे बनाने की अनुमति दे रहा है और यह इसकी स्क्रिप्ट है। सच कहूं तो मुझे खुद भी नहीं पता था कि मैं इसे सही तरीके से कर पाऊंगा या नहीं। 75 दिनों की शूटिंग, 11 एक्शन पीस और नौ गाने थे। इसे  फ्रीडम एट मिडनाइट  से बिल्कुल अलग बनाना था।

सवाल:  द रिवोल्यूशनरीज को फ्रीडम एट मिडनाइट से अलग रखने की क्या कोशिश रही?

फ्रीडम एट मिडनाइट एक तरह से ज्यादा ऑथेंटिक पीरियड पीस था। द रिवोल्यूशनरीज में ऑथेंटिसिटी ऊर्जा, विचार और उस जज्बे में है। इसमें जोश और जुनून बहुत महत्वपूर्ण है। इस पूरी प्रक्रिया में हमने वर्कशॉप और रीडिंग कीं। उसी दौरान कई चीजें हमने खोजीं। मैंने भुवन के साथ काम करते हुए महसूस किया कि वह यह कर सकता है। रोहित और प्रतिभा के साथ भी हमने कई सीन्स को अलग-अलग तरीके से आजमाया।

सवाल: इतनी बड़ी टीम के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

पूरी टीम ने बहुत शानदार काम किया है। सुरभि, गौरव, जीनिया, शिखा, सागर, अक्षिता, शोभित, रुत्वी और सयुक्ता समेत सभी ने बेहतरीन योगदान दिया है। कई सीन्स शूट होने के बाद एडिटिंग टेबल पर और बेहतर हुए। हम किसी सीन की एक कल्पना करके उसे शूट करते हैं, लेकिन एडिटिंग में उसका असर बिल्कुल अलग तरीके से सामने आ सकता है।

भुवन बाम

सवाल: आपका किरदार आपकी अपनी जिंदगी से कितना जुड़ा है?

जिस तरह का रिवोल्यूशन इन क्रांतिकारियों ने लाया, उसके सामने मैंने क्या ही रिवोल्यूशन किया है। हममें से कोई भी वह नहीं कर सकता, जो उन्होंने अपने देश के लिए किया। उन्होंने जो किया, हम उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज हमारे पास सुख-सुविधाएं हैं और हम आराम से बैठकर बातचीत कर रहे हैं, यह भी उन्हीं लोगों की वजह से संभव हुआ है। इसलिए उनके संघर्ष की तुलना अपनी जिंदगी से करना सही नहीं होगा।

सवाल: आपकी अपनी जिंदगी में रिवोल्यूशन कैसे आया?

 मेरे साथ यह एक तरह से संयोग की बात रही। मुझे पता था कि मुझे पढ़ाई नहीं करनी है। मैंने अपने टीचर्स और घरवालों से भी कह दिया था कि पढ़ाई-लिखाई मुझसे नहीं होती। मैंने उनसे कहा कि अगर आप चाहते हैं कि मेरा भविष्य सही हो तो मुझे दो साल अपने तरीके से जीने दीजिए। मैंने इतने साल आपकी पसंद के हिसाब से बाल बनाए, कपड़े पहने, जूते पहने। अब कॉलेज के ये दो साल मुझे अपने हिसाब से जीने दीजिए। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, अगर मैं सफल नहीं हुआ तो वापस आ जाऊंगा और फिर वही करूंगा जो आप कहेंगे।

गुरफतेह पीरजादा 

सवाल: पंजाब से आपके जुड़ाव को देखते हुए विभाजन जो उस समय पंजाब में हुआ था  तो ये सीरीज कितनी रिलेटेबल रही और अनुभव कैसा रहा?

सर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि रिवोल्यूशन होते रहते हैं। वो बड़े-छोटे होते हैं, अलग-अलग होते हैं। लेकिन, आई थिंक, मेरे टाइम में ऐसा कुछ नहीं हुआ, सिवाय जो अभी एक महीने पहले हुआ। लेकिन कभी-कभी, जैसे मेरे भी मेरे नाना आर्मी में थे। उन्होंने दो-तीन वॉर लड़ी थीं। तो उनके टाइम से मैं कहानियां सुनता होता था कि ब्रेवरी की या कि जैसे डर नहीं लगता था। पता नहीं चलता था कि घर वापस आएंगे कि नहीं। तो वो मेरी रिलेटेबिलिटी का एकमात्र पॉइंट था जो कहानियां मैंने सुनी थीं। और मुझे लगता है कि ये शो करने के बाद और इन लोगों के बारे में पढ़ने के बाद एहसास हुआ कि यार, हमारी तो जिंदगी कितनी अलग है। कि असल में मुश्किलें और असली लड़ाइयां तो इन लोगों ने लड़ी हैं। तो हम मतलब हमारी जिंदगी आसान बनी है इनकी वजह से। वो समझ बहुत जरूरी थी आगे की जिंदगी जीने के लिए। तो मैं खुश हूं कि इसका हिस्सा बनकर थोड़ा और जान पाया।

प्रतिभा रांटा 

सवाल: जब आपने इस शो के लिए ऑडिशन दिया और शूट कर रहे थे, तो क्या तैयारी थी?

एक एक्टर के तौर पर मुझे लगता है कि इस पूरे कैनवस में मेरी जो तैयारी थी और मेरा जो योगदान है, वो बस यही रहता है हमेशा से कि मुझे जो मैं पोर्ट्रे कर रही हूं, उसके प्रति सच्चा रहना। क्योंकि ये चारों युवा रिवोल्यूशनरीज इतने साहस और पैशन से भरे हुए थे। ये कल्पना करना कि वो दुनिया कैसी हुआ करती थी... क्योंकि हम तो बहुत अलग समय में जी रहे हैं। खुद को मानसिक और भावनात्मक तौर पर उस समय में ले जाना और उनकी जिंदगी में खुद को रखना, ये बहुत जरूरी था। मुझे लगता है कि जब आप अपने कॉस्ट्यूम में होते हैं, आपका हेयर और मेकअप होता है, आप सेट के अंदर जाते हैं और जैसे-जैसे आप चलते रहते हैं, आप उस दुनिया में जाने लगते हैं। आप अपने को-एक्टर्स के साथ इंटरैक्ट करते हैं। उनकी खुद की एक तैयारी होती है। आप उनके साथ डिस्कस करते हैं। और निश्चित तौर पर सर के साथ हमने बहुत सारी वर्कशॉप्स की थीं। वहां मुझे समझ में आया कि वो प्रतिभा को कैसे देख रहे हैं। उन्होंने प्रतिभा को कितना मॉडर्नाइज करके दिखाया है जिस तरह से वो सोचती है, जिस तरह से वो व्यवहार करती है।

सवाल: जब आपको पता चला कि आप प्रतिभा का किरदार निभा रही हैं और उसका नाम भी यही है, तो रिएक्शन क्या था?

मेरे लिए उससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये था कि प्रतिभा ने जिस तरह का काम किया था, उससे मैं इंस्पायर हुई। नाम पर कभी मेरा उतना ध्यान नहीं गया, जितना मेरा इस चीज पर ध्यान गया कि एक महिला होकर, आपको पता है, अपने देश के लिए लड़ना आपका अंत कुछ भी हो सकता है। उस डर को न रखना और फिर भी अपने देश के लिए बस लड़ते जाना और इतने जोश से लड़ाई करना, मुझे लगता है कि ये चीज मुझे बहुत ज्यादा एक्साइट करती थी। कुछ महिला फ्रीडम फाइटर्स हैं, जिनके बारे में हमारे पास जानकारी थी और उसी के आधार पर हमने प्रतिभा के कैरेक्टर को डेवलप किया था।

रोहित सराफ

सवाल: मिसमैच में आप इतने क्यूट और चॉकलेटी बॉय हो। इस किरदार के लिए आपने खुद को कैसे ट्रांसफॉर्म किया?

मेरी ट्रांसफॉर्मेशन जर्नी ‘द रेवोल्यूशनरीज’ से पहले ही शुरू हो चुकी थी। मैं अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना चाहता था और खुद को पुश करना चाहता था। 15 महीने तक मैंने स्ट्रिक्ट वर्कआउट और डाइट फॉलो की, साथ ही फिल्म के लिए मल्लखंब, कलारी, लाठी और रोप क्लाइम्बिंग जैसी आर्ट फॉर्म्स सीखीं। मेंटल और इमोशनल तैयारी के लिए स्क्रिप्ट रीडिंग, वर्कशॉप्स और निखिल सर के साथ लगातार काम किया, ताकि सचिंद्रनाथ सान्याल की सोच और उनकी जर्नी को समझ सकूं। चूंकि कहानी नॉन-लीनियर तरीके से शूट हो रही थी, इसलिए किरदार की इमोशनल और मेंटल जर्नी भी आखिरी दिन तक बदलती रही।


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Content Editor

Mansi

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