मर्दानी 3 सिर्फ फिल्म नहीं, समाज से सवाल पूछने की कोशिश है: रानी मुखर्जी
punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 10:47 AM (IST)
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। मर्दानी फ्रेंचाइज़ी भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है, जिसने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक चेतना को मजबूती से बड़े पर्दे पर रखा। अब एक बार फिर रानी मुखर्जी ‘मर्दानी 3’ के साथ दर्शकों के सामने लौट रही हैं। फिल्म 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। रानी मुखर्जी ने अपनी एक्साइटमेंट, नर्वसनेस, शिवानी शिवाजी राव के बदले हुए रूप, महिला विलेन, समाज पर सिनेमा के प्रभाव और नेशनल अवॉर्ड के बाद अपने नए दृष्टिकोण पर पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स/जगबाणी/हिंद समाचार से खास बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश...
सवाल: मर्दानी 3 को लेकर आपकी क्या एक्साइटमेंट है। इस वक्त मन में क्या चल रहा है?
मुझे बहुत ज़्यादा एक्साइटमेंट है कि मैं मर्दानी 3 दर्शकों तक लेकर आ रही हूं, 30 जनवरी को। लेकिन इसके साथ ही मैं बहुत नर्वस भी हूं। डर भी लगता है। उम्मीद यही रहती है कि मेरे दर्शक मेरे काम को पसंद करें, मेरी फिल्म को पसंद करें और ये फिल्म हिट हो ताकि मैं और मेहनत करके वापस आ सकूं। मैं दिल से शुक्रिया कहना चाहती हूं उन सबका जो ‘मर्दानी’ के लिए हमेशा चैंपियन बनकर खड़े रहे।
सवाल: इस बार शिवानी शिवाजी राव के किरदार में दर्शकों को क्या नया और अलग देखने को मिलेगा?
मैं हमेशा कहती हूं कि हम औरतें हर दस साल में एक नए अनुभव से गुजरती हैं। शरीर को लेकर, मानसिक स्थिति को लेकर ज़िंदगी को लेकर। जब 2014 में मैं ‘मर्दानी’ लेकर आई थी, तब मैं शादीशुदा नहीं थी। ‘मर्दानी 2’ के समय मैं एक मां बन चुकी थी और अब ‘मर्दानी 3’ में मेरी बेटी दस साल की है। इसी तरह शिवानी शिवाजी राव भी मेरे साथ-साथ अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ी है। पुलिस फोर्स में उसका पद बदला है, उसका डिज़िग्नेशन बदला है। वह अब और ज्यादा अनुभव के साथ आ रही है ज्यादा केस सुलझा चुकी है। आप एक अलग शिवानी देखेंगे, लेकिन उसका जो मूल जज़्बा है नियमों के लिए खड़ा होना, नैतिकता के साथ समझौता न करना वो वही है। स्पिरिट वही है, बस रूप थोड़ा बदला हुआ है।
सवाल: ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज़ी ने एक अभिनेत्री के तौर पर आपकी इमेज को किस तरह बदला है?
मैं खुद ये नहीं कह पाऊंगी कि मेरी इमेज कैसे बदली, लेकिन ये दर्शकों ने तय किया है। दर्शकों ने इस किरदार को सराहा है। उन्होंने मुझे एक स्ट्रॉन्ग, फियरलेस फीमेल कॉप के रूप में देखा है और ये किरदार उनके ज़हन में बैठ गया है। शिवानी शिवाजी राव उन्हें इसलिए पसंद आती है क्योंकि मैं खुद महिला सशक्तिकरण में विश्वास रखती हूं। मैं हमेशा बच्चों और लड़कियों को हौसला देना चाहती हूं उन्हें मजबूत बनाना चाहती हूं। मुझे लगता है कि ये सारी चीज़ें मर्दानी फ्रेंचाइज़ी में साफ दिखाई देती हैं।
सवाल: इस बार फिल्म में एक महिला विलेन है इससे कहानी कितनी ज्यादा प्रभावशाली बनती है?
जब हम क्राइम देखते हैं, तो उसमें जेंडर नहीं देखते। क्राइम, क्राइम होता है चाहे वो औरत करे या मर्द। ‘मर्दानी 3’ में भी बात वही है गुड वर्सेस ईविल। ईविल किसी भी चेहरे में सामने आ सकता है। यह ज़रूरी नहीं कि विलेन हमेशा पुरुष ही हो। जब सामने भी एक महिला विलेन होती है और कानून का प्रतिनिधित्व भी एक महिला कर रही होती है, तो कहानी और ज्यादा असरदार हो जाती है।
सवाल: क्या मर्दानी 3 का कोई ऐसा सीन था जिसने आपको एक मां या एक महिला के तौर पर बहुत झकझोर दिया?
‘मर्दानी 3’ की पूरी कहानी ही बहुत दर्दनाक है। हर मोड़ पर दुख रहता है, खासकर ये सोचकर कि बच्चों के साथ ऐसा हो रहा है। ये कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, बल्कि सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। ऐसी बच्चियों, उनके परिवारों और माता-पिता ने जो दर्द झेला होगा, वो सोचकर मन बहुत दुखी हो जाता है। इसी वजह से मैं ऐसी फिल्में करती हूं ताकि समाज में जागरूकता आए और लड़कियों व बच्चों को पता चले कि हमारे आसपास क्या हो रहा है और हमें सतर्क रहना चाहिए।
सवाल: क्या आपको लगता है कि ‘मर्दानी’ जैसी फिल्में समाज में बदलाव ला सकती हैं?
अगर इतने लोगों में से एक भी इंसान का माइंडसेट बदल जाए, अगर एक भी आदमी ये समझ जाए कि औरतों को इज्जत मिलनी चाहिए, तो वही बहुत बड़ी बात होगी। माइंडसेट बदलना बहुत ज़रूरी है और इसकी शुरुआत घर से होती है। अगर एक लड़का अपने पिता को अपनी मां का सम्मान करते देखता है, तो वह भी महिलाओं को सम्मान देना सीखता है। लेकिन अगर वह घर में हिंसा और गाली-गलौच देखता है, तो उसके सोचने का तरीका गलत हो सकता है।
सवाल: क्या सिनेमा वो सवाल पूछ सकता है, जो आम लोग नहीं पूछ पाते?
बिल्कुल। एक कलाकार के तौर पर मैं अपने विचार अपनी फिल्मों के जरिए व्यक्त कर सकती हूं। सिनेमा समाज से सवाल पूछने की ताक़त रखता है।
सवाल: करियर के 30 साल बाद नेशनल अवॉर्ड मिला। इसे आप मंज़िल मानती हैं या नई शुरुआत?
मैं इसे पूरी तरह एक नई शुरुआत मानती हूं। मुझे लगता है जैसे मेरा नया जन्म हुआ है। आज मुझे ऐसा महसूस होता है कि ‘मर्दानी 3’ मेरे करियर की पहली फिल्म है।
