Ohh My Dog Review: वफादारी, इमोशन और सामाजिक संदेश से भरपूर दिल छू लेने वाली फिल्म

punjabkesari.in Friday, Aug 07, 2026 - 10:56 AM (IST)

फिल्म- ओह माय डॉग (Ohh My Dog)
स्टारकास्ट- माही राय (Mahi Rai) , पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi), पवन मल्होत्रा (Pavan Malhotra), राजेश कुमार (Rajesh Kumar), गीता अग्रवाल (Geeta Agarwal), श्रीधर दुबे (Sridhar Dubey), ऑस्कर (Oscar), ब्रूनो (Bruno)
डायरेक्टर- अमित राय (Amit Rai)
रेटिंग- 3.5*

 

Ohh My Dog: अक्सर बड़े बजट और बड़े सितारों से सजी फिल्मों से दर्शकों को जितनी उम्मीदें होती हैं, कई बार उन्हें छोटे बजट की फिल्में उससे कहीं बेहतर तरीके से पूरा कर देती हैं। ऐसी ही एक संवेदनशील फिल्म लेकर आए हैं निर्देशक अमित राय, जिसका नाम है 'ओह माय डॉग'। यह फिल्म कुत्तों की वफादारी, उनके निस्वार्थ प्रेम और इंसान के साथ उनके अनमोल रिश्ते को बेहद भावुक अंदाज में पेश करती है। वैसे तो कुत्तों को इंसान का सबसे वफादार दोस्त माना जाता है लेकिन हिंदी सिनेमा में इस रिश्ते पर बहुत कम फिल्में बनी हैं। तो चलिए जानते हैं कैसी फिल्म ओह माय डॉग...

कहानी
फिल्म की कहानी दो अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग परिस्थितियों में रहने वाले दो बच्चों और उनके डॉग्स के इर्द-गिर्द घूमती है। असम में रहने वाला टेक्नोलॉजी का शौकीन अप्पू अपने डॉगी मोमो से बेहद प्यार करता है। वहीं बिहार में रहने वाला बाल मजदूर प्रिंस अपने डॉगी ऑस्कर को परिवार का हिस्सा मानता है। एक दिन अचानक मोमो और प्रिंस दोनों लापता हो जाते हैं। पुलिस इन मामलों में ज्यादा मदद नहीं कर पाती लेकिन अप्पू अपने प्यारे मोमो की तलाश में जुट जाता है, जबकि डॉगी ऑस्कर भी अपने मालिक प्रिंस को खोजने के लिए हर संभव कोशिश करता है। तो क्या आखिर में अप्पू को अपना मोमो और ऑस्कर को अपना प्रिंस मिल पाता है या नहीं यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी...

एक्टिंग
अभिनय की बात करें तो माही राय ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार काम किया है। अप्पू के किरदार में उनका आत्मविश्वास और मासूमियत दोनों दर्शकों को प्रभावित करते हैं। वहीं डॉगी ऑस्कर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरता है। उसके भाव और स्क्रीन प्रेजेंस कई दृश्यों को बेहद भावुक बना देते हैं। पवन मल्होत्रा, पंकज त्रिपाठी, गीता अग्रवाल, श्रीधर दुबे और गौतम ने अपने-अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाया है। हालांकि राजेश कुमार कुछ दृश्यों में जरूरत से ज्यादा लाउड नजर आते हैं लेकिन इससे फिल्म पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।

डायरेक्शन
निर्देशक और लेखक अमित राय ने एक बेहद संवेदनशील विषय को प्रभावशाली ढंग से बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। उन्होंने पशु प्रेम के साथ-साथ मानव और जानवरों की तस्करी, डॉग मीट कारोबार, पटाखों से बेजुबान जानवरों को होने वाली तकलीफ और अंग तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को कहानी में सहजता से पिरोया है। फिल्म यह भी दिखाती है कि लालच किस तरह इंसान को संवेदनहीन बना देता है और गरीबी इंसान को किस हद तक मजबूर कर सकती है। हालांकि कहानी दमदार है, लेकिन पटकथा में कसावट की कमी साफ महसूस होती है। फिल्म का पहला भाग थोड़ा धीमा है और कुछ चेज सीक्वेंस जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जिससे रफ्तार प्रभावित होती है। वहीं, कुछ दृश्य तार्किकता की कसौटी पर कमजोर पड़ते हैं और प्रोडक्शन वैल्यू में भी सुधार की गुंजाइश नजर आती है। इसके बावजूद अमित राय अपनी संवेदनशील कहानी और मजबूत संदेश के दम पर दर्शकों का ध्यान बनाए रखने में सफल रहते हैं। 

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Manisha

Related News